– डॉ. शिव प्रताप यादव (डीएसडब्ल्यू)
कृपाशंकर यादव
गाजीपुर। पीजी कॉलेज मलिकपुरा में रविवार को स्वर्गीय बाबू भगवान् सिंह की जयंती हर्ष, श्रद्धा और गरिमामय वातावरण में मनाई गई। यह आयोजन केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि उस महान व्यक्तित्व के शैक्षिक, सामाजिक और मानवीय योगदान पर आत्ममंथन का अवसर था, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज के उत्थान और शिक्षा के प्रसार के लिए समर्पित कर दिया।
जयंती समारोह के अवसर पर कॉलेज परिसर को सजाया गया तथा पुष्पांजलि, विचार गोष्ठी और स्मृति कार्यक्रमों के माध्यम से बाबू भगवान् सिंह के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पीजी कॉलेज की प्राचार्या रेखा मिश्रा तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. शिव प्रताप यादव (डीएसडब्ल्यू) रहे।
डॉ. शिव प्रताप यादव ने अपने संबोधन में कहा कि, “बाबू भगवान् सिंह का जीवन हमें यह सिखाता है कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने यह गहराई से समझा कि अशिक्षा ही शोषण, असमानता और सामाजिक पिछड़ेपन की मूल वजह है।”
स्वर्गीय बाबू भगवान् सिंह ने अपने जीवनकाल में पाँच महत्वपूर्ण शिक्षा संस्थाओं की स्थापना की। उनका उद्देश्य केवल विद्यालय या महाविद्यालय खोलना नहीं था, बल्कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाना था। उनकी संस्थाएं आज भी इस बात की साक्षी हैं कि वे शिक्षा को व्यवसाय नहीं, बल्कि सेवा और सामाजिक दायित्व मानते थे। ग्रामीण और वंचित वर्गों के बच्चों को शिक्षा से जोड़कर उन्होंने सामाजिक न्याय और समान अवसर की मजबूत नींव रखी।
कार्यक्रम के दौरान कई शिक्षकों एवं पूर्व छात्रों ने बाबू भगवान् सिंह के व्यक्तित्व और शिक्षाओं पर अपने अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी विशेषता उनकी सरलता, उच्च विचार और निस्वार्थ सेवा भावना थी। वे न केवल शिक्षा के समर्थक थे, बल्कि मानवीय मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक समरसता के भी प्रबल प्रवर्तक थे। उनके नेतृत्व में अहंकार नहीं, बल्कि सेवा की विनम्रता दिखाई देती थी।
जयंती समारोह के अवसर पर कॉलेज परिसर में चित्र प्रदर्शनी एवं वीडियो प्रस्तुति का भी आयोजन किया गया, जिसमें बाबू भगवान् सिंह के जीवन, संघर्ष और उनके द्वारा स्थापित शिक्षा संस्थानों की यात्रा को दर्शाया गया। विद्यार्थियों ने इस अवसर पर उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. शिव प्रताप यादव ने कहा कि, “स्वर्गीय बाबू भगवान् सिंह का जीवन हमें यह स्मरण कराता है कि सच्चा सम्मान तभी होगा, जब हम शिक्षा को हर व्यक्ति तक पहुंचाने के उनके सपने को साकार करें। उनके द्वारा स्थापित शैक्षिक और सामाजिक मूल्यों को समय के अनुरूप और अधिक सशक्त बनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।”




