हरिहरपुर कालीधाम में दक्षिणमुखी मां काली श्रद्धालुओं के आस्था व विश्वास का केन्द्र है : स्वामी श्री भवानीनन्दन यति जी

Sonu sharma

गाजीपुर । सिद्धपीठ हथियाराम की शाखा हरिहरपुर कालीधाम श्रद्धालुओं के अगाध आस्था व विश्वास का केन्द्र है। यह मंदिर और इसमें विद्यमान मां काली की तीन प्रतिमाएं स्वयं में काफी महत्व रखती हैं। यहां सच्चे हृदय से दर्शन पूजन करने से श्रद्धालुओं के सकल मनोरथ पूर्ण होता है।मान्यता है कि मंदिर में स्थापित तीनों देवी प्रतिमाओं के दर्शन-पूजन से काल को भी टाला जा सकता है। कालीधाम में स्थापित मां काली प्रतिमा की महत्ता का वर्णन करते हुए सिद्धपीठ हथियाराम के पीठाधीश्वर एवं जूना अखाड़ा के वरिष्ठ महामण्डलेश्वर स्वामी श्री भवानीनन्दन यति जी महाराज बताते हैं कि मंदिर में स्थापित दक्षिणमुखी प्रतिमाएं स्वयं में अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। मंदिर में सबसे पहली प्रतिमा शव के ऊपर स्थापित है। इस मूर्ति के बारे में अपने गुरूजी महाराज द्वारा सुनी कथा का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि सैकड़ों वर्ष पूर्व स्थापित इस प्रतिमा की एक अंगुली किसी कारणवश टूट गयी। इसकी जानकारी होने पर उनके गुरूजी महाराज ने खण्डित प्रतिमा के स्थान पर दूसरी प्रतिमा स्थापित कराने की मंशा के तहत प्रतिमा हटवाने का काम शुरू कराया। जैसे ही मजदूर प्रतिमा हटाना शुरू किये, वैसे ही मंदिर के छत से रक्त टपकने लगा। यह देखकर मजदूर काम रोक दिये और गुरूजी महाराज को भी इस बात का अनुभव हुआ तो वह तुरंत मंदिर की तरफ दौड़ पड़े। श्री यति ने बताया कि गुरु महाराज ने खण्डित प्रतिमा के स्थान पर दूसरी प्रतिमा स्थापित कराने के लिए नई प्रतिमा मंगा रखा था, उसे इसी प्रतिमा के ठीक बगल में स्थापित करा दिया गया। बताया कि दो प्रतिमा होने के बाद तीसरी प्रतिमा की स्थापना कराया जाना अपरिहार्य हो गया। फलस्वरूप श्वेत प्रतिमा की स्थापना करायी गयी। यह तीनों प्रतिमाएं मां के तीनों रूपों महासरस्वती, महालक्ष्मी और महाकाली के रूप में अर्चन-वंदन की जाती हैं। इन प्रतिमाओं का स्पर्श करने से इनकी शक्ति क्षीण होती है। हालांकि, इनके अर्चन-वंदन से काल को भी टाला जा सकता है। उधर वासंतिक नवरात्रि प्रतिपदा से शुरू होकर नवरात्र पर्यंत चलने वाले धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लेकर यज्ञ मंडप की परिक्रमा करने और पीठाधीश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिये स्वजनपद समेत देश के कोने कोने से शिष्य श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालुओं के लिये भंडारा की व्यवस्था की गयी है, जिससे फलाहार और महाप्रसाद ग्रहण लोग देवी माता के साथ ही महामंडलेश्वर का जयकारा लगाते हुए अपने घरों को वापस लौट रहे हैं।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Exit mobile version