अर्पण, तर्पण व समर्पण के ही सद्बगृहस्थ का लक्षण : यज्ञाचार्य श्रीधर द्विवेदी

Sonu sharma

गाजीपुर । भांवरकोल क्षेत्र के शेरपुर पंचायत में चल रही श्री रुद्र महायज्ञ के दौरान कथावाचक व्यास धनंजय कृपालु महाराज ने कहा कि संतकृपा से भक्तों के बड़े से बड़े दुख दूर हो जाते हैं। यज्ञ में किया गया जप का एक अरब गुना पुण्य लाभ प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि जिसे उत्थान चाहिए उसे तत्काल तपना होगा। बिना तपे तो हम पूजनीय हो जिसे यह सम्भव नहीं है। एक तप ही है जो जीवन में उत्थान एवं स्मृधि ला सकता है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं में कम समय में अधिक धनोपार्जन के पिछे भाग रहे हैं। उन्होंने युवाओं से अनुरोध किया कि जीवन में कठिन तप करें। इस अवसर पर मेंवाड़ के चित्तौड़गढ़ से पधारे यज्ञाचार्य श्रीधर द्विवेदी ने कहा कि सुख एवं शांति केवल त्याग से ही संभव है। अर्पण, तर्पण एवं समर्पण ही एक सद्गृहस्थ का मुख्य लक्षण है। उन्होंने कहा जो पुण्य है तप है। तप देवता को अर्पण,तर्पण पितरों के लिए तथा अर्पण परिवार एवं समाज के प्रति समर्पित होना ज़रूरी है।इस मौके पर परम संत ज्ञानानंद जी महराज, योगी बिजेंद्र नाथ जी, संत चंन्द़शेखर अघोरी जी, मुकेश शास्त्री, अक्षयानंन्द जी,लल्लन राय, शंकरदयाल रायजि०पं०प़० रबींद्र राय, पकालू राय, डा० रमेश राय, शंकरदयाल राय, आनंन्द पहलवान, गनेश राय, अमरनाथ राय,धनंजय राय, कृष्णानंद उपाध्याय, डब्बू राय, विनित राय सहित काफी संख्या में क्षेत्रवासी श्रद्धालु शामिल रहे।

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