“कल्पना नहीं, अनुभव की बात है — ध्यान और भजन से हो सकता है परमात्मा का दीदार”

अदृश्य अलख से आत्मा को लखाने आते हैं संत महापुरुष -स्वामी जय गुरुबंदे जी

गाजीपुर, मरदह। ग्राम -नागपुर,रसड़ा जनपद – बलिया एवं ग्राम – घरिया ,मरदह , जनपद -गाजीपुर, उत्तर प्रदेश में बुधवार को परम संत स्वामी जय गुरुबंदे जी द्वारा एक दिवसीय सत्संग कार्यक्रम में जनमानस को संबोधित करते हुए बताएं कि मानव किसी भी संत महापुरुष से जुड़कर जाती ,मजहब,पाखंड , आडंबर, रीति रिवाज को त्याग कर उनके सिद्धांत पर चलकर सत्संग ,सेवा ,प्रेम ,भक्ति भजन ,नाम सिमरन को अपने जीवन में अपनाता है तब सतगुरु उस जीव को हंस बनाकर ध्यान समाधि में उतार कर अलख सत्ता को दिखाकर जनाते हैं अर्थात आत्मा परमात्मा से मिलन कराते हैं तब यह अनमोल मानव जीवन संसार सागर से पार जाकर वास्तविकता को समझ कर ग्रहण करता है और मानव धर्म को अपनाकर सभी से प्रेम का रिश्ता रखता है। तेरा मेरा अपना पराया से पृथक होकर ध्यान भजन के गहराई में उतरकर आत्मज्ञान अनुभव पाकर मानव से महामानव बनाकर अपने अमर लोक रूपी मंजिल पर जाता है। जहां सुख -दुख, पाप -पुण्य ,दिन -रात ,माया ,देवी देवता नहीं पहुंचते हैं वहां तो कोई गुरु का भक्त ही जाता है और उसी का सतगुरु की कृपा से तारनतार होता है क्योंकि सतगुरु साहेब जी ने सत्संग में संदेश देते हुए बड़ा स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह कोई कल्पित कपोल बातें नहीं है कोई भी इंसान अपने जीवन में सतगुरु को इष्ट बनाकर भजन ध्यान करके इसको देख परख सकता है की आत्मा का परमात्मा से दीदार कोई उच्च कोटि के महात्मा ही करा सकते हैं।

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