गाजीपुर। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अवगत कराया है कि महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा, उत्तर प्रदेश द्वारा पी०एम० श्री योजना के अन्तर्गत वर्ष 2024-25 में चयनित उच्च प्राथमिक/कम्पोजिट विद्यालयों में ‘लर्निंग बाई डूइंग’ (Learning By Doing) कार्यक्रम को प्रभावी रूप से संचालित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यालयों में विज्ञान एवं गणित सहित विभिन्न विषयों से संबंधित कौशल आधारित गतिविधियों को प्रयोगात्मक एवं व्यावहारिक तरीके से कराया जाएगा। कार्यक्रम के प्रथम एवं द्वितीय चरण के प्रशिक्षण में शिक्षकों को नई गतिविधियों की जानकारी देने के साथ-साथ उनका hands- on-practice कराया गया है, जिससे शिक्षक विद्यार्थियों में वैज्ञानिक एवं गणितीय कौशल विकसित करने के लिए इन गतिविधियों का प्रभावी उपयोग कर सकें *विद्यालयों में नियमित होंगी चार ट्रेड की गतिविधियां* लर्निंग बाई डूइंग कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रशिक्षित शिक्षक/तकनीकी अनुदेशक द्वारा विद्यालयों में नियमित रूप से गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। प्रधानाध्यापक को प्रयोगशाला हेतु क्रय की गई सामग्री का सुरक्षित रख-रखाव तथा उसका रजिस्टर में विवरण दर्ज कराने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रत्येक माह कार्यक्रम की चार ट्रेड की गतिविधियों के फोटो प्रेरणा पोर्टल पर DCF-LBD Activities Photo पर अपलोड किए जाएंगे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी उपासना रानी वर्मा ने बताया कि विद्यालयों में विद्यार्थियों को गणित, विज्ञान, गृह विज्ञान/कौशल आधारित विषयों से संबंधित गतिविधियों के साथ-साथ अवधारणाओं को स्पष्ट करने वाली व्यावहारिक गतिविधियां कराई जाएंगी। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रयोगशाला में गतिविधियों के दौरान आवश्यक सावधानियां बरतने के निर्देश दिए गए हैं। कार्यक्रम के प्रभावी अनुश्रवण के लिए प्राचार्य, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा प्रत्येक माह कम से कम 02 विद्यालयों में लर्निंग बाई डूइंग प्रयोगशाला की स्थापना एवं विद्यार्थियों द्वारा की जा रही गतिविधियों का अनुश्रवण किया जाएगा। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि लर्निंग बाई डूइंग कार्यक्रम का नियमित संचालन, गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग, गतिविधियों का अनुश्रवण तथा फोटो/गतिविधियों का निर्धारित पोर्टल पर अपलोड सुनिश्चित किया जाए, ताकि विद्यार्थियों में करके सीखने की प्रवृत्ति, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक क्षमता एवं व्यावहारिक कौशल का विकास हो सके।


