गाजीपुर मुर्गा मंडी वध मामला: दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, दो हफ्ते में जवाब नहीं तो अवमानना कार्यवाही

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने गाजीपुर मुर्गा मंडी में पक्षियों के वध पर रोक से जुड़े अपने वर्ष 2018 के आदेशों का पालन न होने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। गुरुवार को अदालत ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और अन्य संबंधित नागरिक प्राधिकरणों को अवमानना याचिका पर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए तो अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान रिकॉर्ड पर रखी गई तस्वीरों का अवलोकन किया और सवाल उठाया कि क्या 24 सितंबर 2018 के आदेश का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, “कृपया सुनिश्चित करें कि ऐसा किया जाए। यह भयावह है।”

यह सुनवाई पशु कल्याण कार्यकर्ता गौरी मौलेखी द्वारा दायर अवमानना याचिका पर हो रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालत द्वारा पक्षियों के वध पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद गाजीपुर मुर्गा मंडी में मुर्गियों और अन्य पक्षियों का अवैध वध लगातार जारी है। मौलेखी ने अपने दावों के समर्थन में अदालत के समक्ष तस्वीरें भी प्रस्तुत कीं, जिनसे जमीनी स्तर पर आदेशों के उल्लंघन का दावा किया गया।

एमसीडी की ओर से पेश अधिवक्ता तुषार सन्नू ने अदालत को बताया कि नगर निगम ने दोषी प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बिना लाइसेंस या लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन कर संचालित किसी भी बूचड़खाने के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

संक्षिप्त सुनवाई के बाद खंडपीठ ने सभी प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे दो सप्ताह के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करें, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि 2018 के आदेशों के अनुपालन के लिए अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं।

गौरतलब है कि 24 सितंबर 2018 के अपने फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट ने गाजीपुर मुर्गा मंडी में बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय उल्लंघनों और प्रदूषण नियंत्रण मानकों को लागू करने में संबंधित अधिकारियों की विफलता पर कड़ा संज्ञान लिया था। अदालत ने क्षेत्र में पक्षियों के वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए केवल जीवित पक्षियों की बिक्री की अनुमति दी थी, जब तक कि एक कानूनी और पर्यावरण-अनुकूल बाजार स्थापित न हो जाए।

अस्वीकरण: यह समाचार एजेंसी फीड से स्वतः प्रकाशित सामग्री पर आधारित है। संपादकीय स्तर पर इसमें कोई संशोधन नहीं किया गया है।

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