
गाज़ीपुर । नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो रामावतार प्रसाद की अदालत ने दो आरोपियों बबलू राम और चंद्रशेखर को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 60 हज़ार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि अर्थदंड की पूरी राशि पीड़िता को सौंपी जाएगी। यह मामला बहरियाबाद थाना क्षेत्र का है। पीड़िता 12 साल की एक मासूम बच्ची थी, जिसकी मां का पहले ही निधन हो चुका था और पिता रोज़ी-रोटी के लिए बाहर रहते थे। इसी मौके का फ़ायदा उठाकर बबलू राम और चंद्रशेखर अक्सर उसके घर पहुंचते और उसके साथ दुष्कर्म करते। घटना का खुलासा तब हुआ, जब पीड़िता की बड़ी बहन ने दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया और किसी तरह अपनी छोटी बहन को उनके चंगुल से छुड़ाकर घर ले आई। पिता की तहरीर पर 7 सितंबर 2024 को मामला दर्ज हुआ। विवेचना के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में चार्जशीट दाखिल की। मामला 3 मार्च 2025 को अदालत में आया। विशेष लोक अभियोजक रविकांत पांडेय ने कुल 7 गवाह पेश किए, जिन्होंने अभियोजन पक्ष का समर्थन किया। इस दौरान आरोपी बबलू राम जेल में ही रहा, जबकि चंद्रशेखर को ज़मानत मिली। लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद उसने गांव के एक संभ्रांत प्रतिनिधि पर जानलेवा हमला कर दिया, जिसमें पीड़ित का हाथ कट गया और आंख फूट गई। बढ़ते दबाव के बाद चंद्रशेखर ने जमानत तुड़वाकर कोर्ट में सरेंडर कर दिया। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई ।


