गाजीपुर। अपनी लंबित मांगों और बढ़ते उत्पीड़न के विरोध में गुरुवार को जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं खुलकर सड़क पर उतर आईं। जिला मुख्यालय से विकास भवन स्थित डीपीओ कार्यालय तक जुलूस निकालकर उन्होंने जोरदार प्रदर्शन किया और विभाग पर समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाया।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं जिलाध्यक्ष चंद्रप्रभा ने कहा कि संगठन की ओर से कई बार पत्र लिखकर मांगों से अवगत कराया गया, लेकिन विभाग ने आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का लगातार उत्पीड़न बढ़ रहा है, जिससे उनमें भारी आक्रोश व्याप्त है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगों में न्यूनतम मानदेय 22 हजार रुपये और सहायिकाओं का 11 हजार रुपये निर्धारित करने का आदेश तत्काल जारी करना शामिल है। उनका कहना है कि मौजूदा मानदेय महंगाई के दौर में बेहद अपर्याप्त है, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो गया है, जबकि कई अन्य राज्यों में आंगनबाड़ी कर्मियों को सम्मानजनक मानदेय दिया जा रहा है।
कार्यकर्ताओं ने खराब हो चुके मोबाइल फोन बदलने और मोबाइल रिचार्ज का पैसा दिए जाने की भी मांग उठाई। उनका कहना है कि वर्ष 2019 के बाद से मोबाइल रिचार्ज के लिए कोई भुगतान नहीं हुआ है, मजबूरी में उन्हें अपने कम मानदेय से रिचार्ज कराना पड़ता है, जिससे विभागीय कार्य प्रभावित हो रहा है।
इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की संबद्धता समाप्त करने, वर्षों से लंबित केंद्रों के किराये का भुगतान करने तथा आंगनबाड़ी केंद्रों पर बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुख रही।
संगठन ने 62 वर्ष की आयु पूरी करने पर बिना ग्रेच्युटी और पेंशन के सेवा समाप्त किए जाने पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने मांग की कि सेवानिवृत्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ग्रेच्युटी और पेंशन का लाभ दिया जाए, ताकि वृद्धावस्था में उन्हें भुखमरी जैसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
प्रदर्शन के अंत में संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

