यज्ञ से प्रकृति एवं समाज का संस्कार होता है – स्वामी अनंन्तानंन्द सरस्वती

गाजीपुर। भांवरकोल क्षेत्र के शेरपुर खुर्द ग्राम स्थित श्री हनुमान मंदिर पर आगामी 19 फरवरी से 27 फरवरी तक होने वाले महामृत्युंजय महायज्ञ के ध्वजा स्थापना के निमित्त आज गुरूवार के दिन काशी से पधारे राजगुरु मठ के पीठाधीश्वर परम संत जगतगुरू स्वामी अनंन्तानंन्द सरस्वती की देखरेख में विद्वत पंडितों द्वारा बैदिक मंत्रोचार के बीच बिधि बिधान से मंडप ध्वजा स्थापना का कार्य संपन्न हुआ। इसके साथ ही समस्त देवताओं का आवाहन, पूजन आदि कार्य भी संपन्न हुआ। इस मौके पर विद्वान पंडितों ने वेदों के मंत्र पाठ से पूरा गांव भक्तिमय हो गया। इस मौके पर परम विभूषित जगतगुरू स्वामी अनंन्तानंन्द सरस्वती जी ने यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यज्ञ, दान ,तप का कभी भी त्याग नहीं करना चाहिए। अपने सामर्थ्य के अनुसार सहयोग व आयोजन करते रहना चाहिए। जिससे भगवत कृपा का सहज लाभ मानव जीवन को मिलता रहे। उन्होंने कहा कि यज्ञ से प्रकृति एवं समाज का संस्कार होता है। जीव में भक्ति ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके दर्शन मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। उन्होंने कहा कि यज्ञ का धुआं वातावरण एवं वायु मंडल को शुद्ध करने के साथ लोगों के आत्मबल को बढ़ाता है। यज्ञ से वातावरण में शुद्धता के साथ-साथ अपने भीतर के अवगुण भी दूर होते हैं। साथ ही समाज में भाईचारगी एवं सद्भाव का वातावरण का सृजन होता है । उन्होंने बताया कि यज्ञ के दौरान सभी देवतागण सूक्ष्म रूप से उपस्थित होकर जीव को आशीर्वाद देते हैं। कहा कि कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहि पारा। इस कलिकाल में भगवान का स्मरण मात्र से जीव के सभी पापों से मुक्ति का एक मात्र आधार ईश्वर की भक्ति ही है। भगवान का नाम स्मरण करने से ही भक्तों को मोक्ष का रास्ता प़शस्त हो जाता है। उन्होंने बताया कि यज्ञ से मन, शरीर, और बुद्धि जागृत होती है तथा आत्मज्ञान और आत्म-साक्षात्कार होता है।शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।जीवन में सफलता और समृद्धि मिलती है। कहा कि महारूद्र महायज्ञ भगवान शिव की पूजा का शक्तिशाली और सर्वोच्च रूप है। सभी प्राणियों के कल्याण, सार्वभौमिक शांति और समृद्धि एवं विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। इस मौके पर गोवर्धन मिश्र, रामानंद जी,इंन्द़जीत मिश्र, सुरेन्द्र शर्मा डा० रमेश राय, मृत्युंजय शर्मा हेमनाथ राय, रमेश राय,मिथिलेश राय, रामबली राय, आनंद राय,डा० आलोक राय ओमप्रकाश राय, डा. आलोक राय, नीरज राय,अमरनाथ राय, धन्नजय राय, राहुल राय,लेरिक यादव, जयप्रकाश राय, नरेंद्र राय, दीपू राय, संजीव राय, आशीष राय, मिंटू राय,मन जी राय, पंकज पाल, सहित काफी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।

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