शरभंग मुनि की गति, श्रीराम की प्रतिज्ञा, भक्त सुतीक्ष्ण एवं अगस्त्य मुनि से भेंट और प्रभु के दस अवतारों की झांकी का भावपूर्ण मंचन

गाजीपुर। अतिप्राचीन श्रीरामलीला कमेटी हरिशंकरी के तत्वावधान में गुरुवार को रामलीला के दसवें दिन अर्बन बैंक के पास राजा शंभूनाथ के बाग में श्रीराम संवाद, शरभंग मुनि की गति, श्रीराम की प्रतिज्ञा, भक्त सुतीक्ष्ण एवं अगस्त्य मुनि से भेंट और प्रभु के दस अवतारों की झांकी का भावपूर्ण मंचन किया गया। लीला के विभिन्न प्रसंगों को देखकर दर्शक भावविभोर हो उठे। लीला का शुभारंभ कमेटी के मंत्री ओमप्रकाश तिवारी सहित अन्य पदाधिकारियों ने प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता को माल्यार्पण कर आरती-पूजन के साथ किया। इसके बाद राजा भैया आदर्श श्रीरामलीला मंडल के कलाकारों ने रामचरितमानस के प्रसंगों का सजीव मंचन किया।लीला में दिखाया गया कि महर्षि अत्रि से आज्ञा लेकर प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता वन की ओर प्रस्थान करते हैं। वन यात्रा के दौरान प्रभु शरभंग मुनि के आश्रम पहुंचते हैं। श्रीराम के दर्शन पाकर मुनि स्वयं को धन्य मानते हैं। वे बताते हैं कि प्रभु के वन आगमन का समाचार सुनकर वे लंबे समय से उनके दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे। शरभंग मुनि प्रभु से कहते हैं, “नाथ सकल साधन मैं हीना। कीन्ही कृपा जानि जन दीना।” अर्थात वे स्वयं को सभी साधनों से रहित और प्रभु की कृपा का पात्र मानते हैं। इसके बाद मुनि योग, जप और तप सहित अपने समस्त पुण्य कर्म प्रभु के चरणों में समर्पित कर देते हैं। सांसारिक आसक्ति त्यागकर वे चिता पर बैठकर अपने नश्वर शरीर का त्याग करते हैं और प्रभु के परमधाम को प्रस्थान करते हैं।शरभंग मुनि के आश्रम से आगे बढ़ते हुए प्रभु श्रीराम वन में ऋषि-मुनियों के अस्थि-समूह देखते हैं। इसका कारण पूछने पर ऋषि बताते हैं कि राक्षसों ने तपस्वियों की हत्या कर उनके शरीर को नष्ट कर दिया है। यह सुनकर प्रभु श्रीराम करुणा और धर्मरक्षा के संकल्प से दोनों भुजाएं उठाकर प्रतिज्ञा करते हैं—“निसिचर हीन करउँ महि, भुज उठाइ पन कीन्ह। सकल मुनिन्ह के आश्रमन्हि, जाइ जाइ सुख दीन्ह॥”अर्थात भगवान श्रीराम संकल्प लेते हैं कि वे पृथ्वी को राक्षसों के अत्याचार से मुक्त करेंगे और सभी ऋषि-मुनियों के आश्रमों में जाकर उन्हें भयमुक्त जीवन प्रदान करेंगे। यह प्रसंग धर्म की रक्षा, अन्याय के प्रतिकार और निर्बलों की सुरक्षा का संदेश देता है।इसके बाद लीला में प्रभु श्रीराम की भक्त सुतीक्ष्ण और महर्षि अगस्त्य से भेंट का मंचन हुआ। इसके बाद रामलीला लंका मैदान के लिए रवाना हो गई। जहां रामलीला मैदान के पूर्वी छोर पर राम जानकी मंदिर पर भगवान के दस अवतारों की आकर्षक झांकी प्रस्तुत की गई, जिसके दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। इस अवसर पर कमेटी के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह, मंत्री ओमप्रकाश तिवारी, उपमंत्री लवकुमार त्रिवेदी, मेला प्रबंधक मनोज कुमार तिवारी, मेला उपप्रबंधक मयंक तिवारी, कोषाध्यक्ष बाबू रोहित अग्रवाल, कृष्णांश त्रिवेदी सहित कमेटी के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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