शिक्षा और संस्कृति का संगम है महर्षि विश्वामित्र कल्चरल क्लब” – डॉ. माधव कृष्ण

गाज़ीपुर। महर्षि विश्वामित्र कल्चरल क्लब के सौजन्य से स्नातकोत्तर महाविद्यालय मलिकपूरा में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके उपरान्त अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय परिवार की ओर से अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर किया गया। मुख्य प्रशिक्षणकर्ता वरिष्ठ कवि और साहित्यकार डॉ. माधव कृष्ण ने अपने विस्तृत उद्बोधन में पुराणों से लेकर आधुनिक संदर्भों तक भारतीय सांस्कृतिक चेतना की निरंतरता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि ऋषि-मुनियों का तप, साधना और वेद–उपनिषदों के ज्ञान ने भारतीय समाज को एक अद्वितीय सांस्कृतिक आत्मा दी है। आधुनिक परिप्रेक्ष्य में उन्होंने यह स्पष्ट किया कि शिक्षा तभी सार्थक होगी जब वह छात्रों में संवेदनशील नागरिकता, नैतिक दृष्टि और रचनात्मकता विकसित करे। अपने वक्तव्य में वे विशेष रूप से छात्रों से संवाद भी किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. ए. के. राय ने कहा कि विद्यार्थी यदि अपनी जड़ों से जुड़े रहेंगे तभी शिक्षा की सार्थकता बढ़ेगी। उन्होंने महर्षि विश्वामित्र के जीवन को संकल्प, साधना और संस्कृति का आदर्श बताते हुए युवाओं को उनसे प्रेरणा लेने का संदेश दिया। अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य प्रो. (डॉ.) दिवाकर सिंह ने कहा कि महाविद्यालय में ऐसे आयोजन शिक्षा को केवल अकादमिक दायरे में सीमित नहीं रखते, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना भी जाग्रत करते हैं।इस अवसर पर हिंदी विभाग के डॉ. अनुज कुमार सिंह ने महर्षि विश्वामित्र कल्चरल क्लब की स्थापना एवं उद्देश्य को सारगर्भित ढंग से प्रस्तुत किया। भूगोल विभाग के प्रभारी डॉ. अभिषेक कुमार के निर्देशन में तैयार क्लब गीत महाविद्यालय की छात्राओं ने भावपूर्ण स्वर में प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं द्वारा खूब सराहा गया। अतिथियों का परिचय एवं बीज वक्तव्य वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने प्रस्तुत किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन शिक्षाशास्त्र विभाग के प्रभारी डॉ. प्रवेश कुमार जायसवाल ने किया। क्लब के सक्रिय सदस्य डॉ. प्रिंस कसौधन का इस प्रशिक्षण कार्यशाला में विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन क्लब प्रभारी डॉ. सर्वेश पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं छात्र-छात्रा उपस्थित रहे ।

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