सनातन धर्म के मूल को अपनाकर युवा कर सकते हैं राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान : दुर्गेश उपाध्याय

ग़ाज़ीपुर । सनातन धर्म और युवाओं की भूमिका” विषय पर कराहियाँ, गहमर में आयोजित एक विचार सम्मेलन में वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक दुर्गेश उपाध्याय ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और युवाओं को सनातन संस्कृति से जुड़ने का संदेश दिया।अपने संबोधन में श्री उपाध्याय ने कहा कि सनातन धर्म शाश्वत, वैज्ञानिक और सार्वकालिक है। इसकी जड़ें भारतीय सभ्यता में इतनी गहरी हैं कि यह केवल एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को आवश्यकता है कि वे अपने मूल्यों, परंपराओं और संस्कृति को समझें और आत्मसात करें।“राष्ट्र निर्माण केवल आर्थिक या तकनीकी विकास से नहीं होता, बल्कि सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण से होता है। और वह चेतना हमें सनातन धर्म से प्राप्त होती है,” उन्होंने कहा।श्री उपाध्याय ने युवाओं को आह्वान किया कि वे स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविंद, और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे महापुरुषों से प्रेरणा लें, जिन्होंने अपने विचारों और कार्यों से देश को दिशा दी। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल धार्मिक जीवन तक सीमित नहीं है, यह नीति, धर्म, विज्ञान, पर्यावरण और समाज के हर पहलू से जुड़ा है। महाकुंभ-2025 का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में और यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 66 करोड़ लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई उसमें आधे से ज़्यादा लोग युवा पीढ़ी के थे. उन्होंने बताया कि पिछले 8 सालों में सनातन धर्म से जुड़े हुए कंटेंट को सोशल मीडिया पर सर्च करने वालों की संख्या में 300 गुना तक की बढ़ोतरी हुई है, ये दिखाता है कि युवाओं में सनातन धर्म और परंपरा को जानने के बारे में रुचि कितनी बढ़ी है।सम्मेलन में बड़ी संख्या में युवा, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी वर्ग उपस्थित रहा। कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय सामाजिक संस्था “सनातनवादी संकल्प समिति ” संस्था द्वारा किया गया ,  जिसका उद्देश्य युवाओं को भारत की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना और राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है।कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने दुर्गेश उपाध्याय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विचार युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं और इस तरह के आयोजनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

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