गाजीपुर। गाजीपुर जिले में सामने आई एक भयावह स्वास्थ्य त्रासदी ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। जिले के लगभग एक दर्जन गांवों में बच्चे एक ऐसी अनोखी और रहस्यमयी बीमारी की चपेट में हैं, जो न सिर्फ उनके शरीर को बल्कि पूरे भविष्य को अपाहिज बना रही है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये बच्चे जन्म के समय पूरी तरह स्वस्थ होते हैं, लेकिन 4 से 6 महीने के भीतर अचानक तेज बुखार की चपेट में आ जाते हैं। इसके बाद उनका शारीरिक और मानसिक विकास रुक जाता है और वे जीवनभर के लिए दिव्यांग हो जाते हैं।
🔹 12 गांव, एक जैसी कहानी
फतेहुल्लापुर, बहादीपुर, हरिहरपुर, हाला, छोटी जंगीपुर सहित करीब 12 गांवों में हालात एक जैसे हैं। हर गांव में दर्जनों बच्चे इस बीमारी से जूझ रहे हैं। कई परिवारों में तो दो-दो बच्चे इस रहस्यमयी बीमारी का शिकार हैं।
हरिहरपुर गांव का मामला दिल दहला देने वाला है, जहां एक परिवार की दो बेटियां जन्म के समय बिल्कुल स्वस्थ थीं, लेकिन कुछ महीनों के अंतराल पर दोनों को तेज बुखार आया और आज वे पूरी तरह मानसिक रूप से अक्षम हैं। उनके पिता गुजरात में मजदूरी करते हैं और घर इसलिए नहीं लौटते ताकि यात्रा का पैसा बचाकर इलाज में लगा सकें। इसके बावजूद लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी डॉक्टर बीमारी की पहचान नहीं कर सके हैं।
⛓️ जंजीरों में बंधा बचपन, मां-बाप की बेबसी
बीमारी की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई गांवों में माता-पिता अपने बच्चों को रस्सियों या लोहे की जंजीरों से बांधकर रखने को मजबूर हैं। परिजनों का कहना है कि मानसिक संतुलन बिगड़ने के कारण बच्चे भाग जाते हैं या खुद को और दूसरों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
शिकारपुर, धरी कला, अगस्ता, भोरहा, भिक्केपुर और रठूली जैसे गांवों में हर दूसरे-तीसरे घर में 8 से 10 बच्चे इस बीमारी से पीड़ित हैं। बच्चों की देखभाल, भोजन और नित्य क्रियाएं अब बूढ़े मां-बाप के लिए भारी बोझ बन चुकी हैं।
🏛️ राज्यपाल के दरबार तक पहुंची पीड़ा
इस गंभीर मुद्दे को ‘राष्ट्रीय युवा सम्मान’ से सम्मानित सिद्धार्थ राय ने प्रमुखता से उठाया। शुरुआत में इसे सामान्य बीमारी मानते हुए उन्होंने जिलाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा, जिसके बाद केवल औपचारिक स्वास्थ्य कैंप लगाकर खानापूर्ति की गई।
जब समस्या की गंभीरता सामने आई, तो सिद्धार्थ राय ने सीधे राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात कर पूरे मामले से अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सामान्य दिव्यांगता नहीं, बल्कि किसी रहस्यमयी वायरस या गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी का मामला है, जो बड़े क्षेत्र को अपनी चपेट में ले चुका है।
📄 प्रशासन हरकत में, जांच की उम्मीद
राज्यपाल के संज्ञान लेने के बाद उनके विशेष कार्य अधिकारी (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ. सुधीर एम. बोबडे ने गाजीपुर जिलाधिकारी को कड़ा पत्र लिखकर मामले में तत्काल कार्रवाई और विस्तृत रिपोर्ट सचिवालय भेजने के निर्देश दिए हैं।
हाल ही में जिलाधिकारी ने सिद्धार्थ राय को कार्यालय बुलाकर पूरे प्रकरण की जानकारी ली। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम गठित कर प्रभावित गांवों में गहन जांच और इलाज की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बीमारी को जैपनीज इंसेफेलाइटिस (दिमागी बुखार) या किसी नए प्रकार के न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, जब तक उच्च स्तरीय मेडिकल जांच और वैज्ञानिक अध्ययन नहीं होता, तब तक इन मासूम बच्चों का भविष्य अंधेरे में ही रहेगा।



