गाजीपुर विनियमित क्षेत्र में भवन निर्माण हुआ आसान, नई भवन उपविधि व आदर्श जोनिंग रेगुलेशन-2025 लागू
गाजीपुर। जनपद गाजीपुर के विनियमित क्षेत्र में अब भवन निर्माण की प्रक्रिया और अधिक सरल हो गई है। उत्तर प्रदेश भवन निर्माण एवं विकास उपविधि तथा आदर्श जोनिंग रेगुलेशन-2025 को विधिवत अंगीकार कर लिया गया है। इस संबंध में उपजिलाधिकारी सदर एवं नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र गाजीपुर ने जनसामान्य को नई व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं से अवगत कराया।
उन्होंने बताया कि गाजीपुर विनियमित क्षेत्र की सीमा में नगर पालिका परिषद गाजीपुर का सम्पूर्ण क्षेत्र एवं तहसील सदर के 47 राजस्व ग्राम (ग्रामीण आबादी को छोड़कर) सम्मिलित हैं। इनमें महाराजगंज, चक शहरुल्लाह हेतिमपुर, अतरौली, पहाड़पुर उर्फ लंगरपुर, छावनी लाइन, सोहिलपुर देहाती, गौसाबाद, गोण्डा देहाती, चक विशम्भर बीकापुर, अन्धऊ, चन्दनवाहा, फतेहपुर सिकन्दर, मिश्रौलिया, कपूरपुर, पीथापुर, आलमपट्टी, अलावलपुर, रौजा शाहबुद्दीन, कैथवलिया, जमलापुर, फूलपुर, अकरामपुर उर्फ बंजारीपुर सहित अन्य क्षेत्र शामिल हैं।
उपजिलाधिकारी ने बताया कि गाजीपुर महायोजना-2031 को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इसके अंतर्गत उत्तर प्रदेश भवन उपविधि-2025 एवं आदर्श जोनिंग रेगुलेशन-2025 को नियंत्रक प्राधिकारी बोर्ड, विनियमित क्षेत्र गाजीपुर द्वारा अनुमोदित किया गया है। महायोजना-2031 में निर्धारित भू-उपयोग एवं नवीन भवन उपविधियों के मानकों के अनुरूप नगर के नियोजित विकास हेतु कॉलोनी (प्लाटिंग) के मानचित्र का अनुमोदन अनिवार्य किया गया है।
उन्होंने बताया कि स्वीकृत कॉलोनियों में भू-खंडों पर भवन निर्माण की प्रक्रिया को अत्यंत सरल बना दिया गया है। अब स्वीकृत कॉलोनी के भू-खंडों पर भवन निर्माण के लिए अलग से अनुज्ञा लेने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल एक रुपये की टोकन राशि जमा कर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसके अंतर्गत 100 वर्ग मीटर तक के भू-खंडों पर आवासीय भवन तथा 30 वर्ग मीटर तक के भू-खंडों पर वाणिज्यिक भवनों का निर्माण किया जा सकेगा।
इसके अतिरिक्त, लाइसेंस प्राप्त तकनीकी व्यक्ति द्वारा तैयार किए गए मानचित्रों के साथ आवश्यक प्रमाणपत्र, दस्तावेज एवं समस्त देय शुल्क जमा करने पर 500 वर्ग मीटर तक के आवासीय भवन एवं 200 वर्ग मीटर तक के वाणिज्यिक भवनों के मानचित्रों का तत्काल अनुमोदन किया जाएगा। वहीं महायोजना में आवासीय भूमि उपयोग हेतु चिन्हित क्षेत्रों में 300 वर्ग मीटर तक के भू-खंडों पर निर्मित व्यक्तिगत आवासीय भवनों के नक्शे निर्धारित शर्तों के अंतर्गत स्वचालित रूप से स्वीकृत माने जाएंगे।
उपजिलाधिकारी ने यह भी बताया कि वास्तुविद, चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टर, वकील जैसे सर्विस प्रोफेशनल्स अपने आवासीय भवनों में 25 प्रतिशत एफएआर तक व्यावसायिक उपयोग कर सकेंगे, जिसके लिए अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी, बशर्ते पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था हो। इसी प्रकार आवासीय भवनों को होम-स्टे अथवा पेइंग गेस्ट हाउस के रूप में उपयोग करने के लिए भी पृथक अनुज्ञा की जरूरत नहीं होगी।
उन्होंने जनसामान्य से अपील की कि वे स्वीकृत कॉलोनियों में भू-खंड क्रय कर इस सरल, पारदर्शी एवं सुविधाजनक भवन निर्माण व्यवस्था का अधिकतम लाभ उठाएं।



