
गाजीपुर। नोनहरा थानांतर्गत ग्राम पारा में इमामबाड़ा मीर हुसैन असग़र में मोहम्मद साहब की इकलौती बेटी जनाब ए फात्मा जहरा की शहादत के उपलक्ष्य में मजलिस का आयोजन किया गया जिसमें सर्वप्रथम सोज़ख्वानी नदीमुल हसन रज़मी पारवी ने अपने साथियों के साथ की। पेशख्वानी में अयान आज़मी, ताहिर बनारसी, ज़ैन बनारसी और मुनव्वर जलालपुरी ने अपने अपने कलाम पेश किए। मजलिस को संबोधित करते हुए ईरान कल्चर हाउस के मौलाना डॉक्टर सैय्यद क़मर हसनैन रिज़वी बताते हैं कि आज पूरी दुनिया में रसूल की इकलौती बेटी फात्मा की शहादत का रोज़ है जिनको बाद ए रसूल सता कर रुला कर उसका दरवाज़ा जलाकर शहीद कर दिया गया।
मौलाना आगे बताते हैं कि रसूल ने अपनी एक हदीस में बताया कि फातिमा मेरे जिगर का टुकड़ा है और जो मेरे जिगर के टुकड़े को अज़ीयत देगा, उसे परेशान करेगा वो मुझे परेशान करेगा और जो मुझे परेशान करेगा वो खुदा को परेशान (नाराज़) करेगा और जो ख़ुदा को नाराज़ करे वो जन्नत में कैसे जा सकेगा?मौलाना आगे बताते हैं कि जिस समय अरब में लड़कियों की पैदाइश पर ग़म मनाया जाता था, लड़कियों को ज़िंदा दफ़न कर दिया जाता था उसी वक़्त मोहम्मद के घर इस बेटी ने जन्म लिया जिससे कि आगे चलकर मुहम्मद साहब की नस्ल भी चली और पूरी दुनिया में बेटी का स्थान बुलंद किया।
मौलाना आगे बताते हैं कि जनाब ए फात्मा ने सबसे पहले दुनिया मे विधवा पेंशन की शुरुआत की, दुनिया में महिलाओं हेतु स्वावलंबीकरण का नारा दिया। पूरी दुनिया में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की पहचान भी फातमा जहरा ही हैं। मौलाना बताते हैं कि ऐसी बेटी को बाद ए रसूल सताया गया और अंततः शहीद कर दिया गया। मौलाना बताते हैं कि फातमा अंतिम समय में अपने बाबा के कुछ साहबियों से नाराज़ थी और उनको अपने जनाजे मे आने से मना कर दिया था।
मजलिस के बाद अयान आज़मी ने पुर्ददर्द आवाज में नौहे को पेश किया। कार्यक्रम का संचालन साकिब ग़ाज़ीपुरी ने किया।
इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से आरज़ू पारवी, क़ैसर इमाम, तक हुसैन, सलमान हैदर, जॉन हुसैनी, मुज्तबा खान, सैय्यद काजिम अब्बास, सैयद एलिया, मोहसिन आब्दी, सैयद अली पारवी, सैयद महवर अब्बास आदि लोग उपस्थित रहे।



