फर्जी कॉल, ओटीपी और सोशल मीडिया ठगी पर प्रहार, ग्रामीण विकास संस्थान में चला साइबर जागरूकता अभियान

गाजीपुर। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों और डिजिटल माध्यमों से होने वाली धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से ग्रामीण विकास संस्थान की ओर से बुधवार को शुभ्रा होटल कंफर्ट इन में साइबर अपराध, बुलिंग से बचाव और त्वरित प्रतिक्रिया विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें करीब 100 कर्मचारियों को साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ठगी, सोशल मीडिया की सुरक्षा और साइबर बुलिंग से बचाव के बारे में जानकारी देकर जागरूक किया गया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अपर पुलिस अधीक्षक नगर एवं साइबर अपराध के नोडल अधिकारी राकेश कुमार मिश्रा रहे।

साइबर क्राइम थाने के प्रभारी निरीक्षक रहमतुल्लाह खां सहित पुलिस, आपातकालीन सेवा 112 और मिशन शक्ति विभाग से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों ने प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षकों ने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से साइबर अपराध के तरीकों और उनसे बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी।प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि साइबर अपराधी ऑनलाइन खरीदारी, नकली नौकरी, लॉटरी और इनाम का लालच देकर लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं। निवेश के नाम पर अधिक मुनाफे का झांसा देने और तत्काल ऋण उपलब्ध कराने वाले फर्जी मोबाइल एप के माध्यम से भी लोगों की निजी जानकारी और धनराशि हड़पने का प्रयास किया जाता है। ऐसे में किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध एप डाउनलोड करने या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा करने से बचना चाहिए।डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराने वालों से रहें सतर्कअधिकारियों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी के प्रति विशेष रूप से सचेत किया। बताया गया कि साइबर ठग पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर फोन करते हैं और गिरफ्तारी का डर दिखाकर लोगों से रुपये ऐंठने का प्रयास करते हैं। किसी भी व्यक्ति को फोन या वीडियो कॉल पर डराकर डिजिटल अरेस्ट नहीं किया जा सकता। ऐसी कॉल आने पर घबराने के बजाय उसकी सत्यता की जांच करनी चाहिए और ठगों के कहने पर धनराशि हस्तांतरित नहीं करनी चाहिए।

इसके साथ ही ओटीपी के जरिए ठगी, फिशिंग, कॉल फॉरवर्डिंग धोखाधड़ी, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया खातों को सुरक्षित रखने तथा मजबूत पासवर्ड के उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को संचार साथी सहित सरकार की ओर से उपलब्ध डिजिटल सुरक्षा संबंधी साधनों के उपयोग के बारे में भी बताया गया।महिला सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं की दी जानकारीप्रशिक्षण में साइबर बुलिंग यानी इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से किए जाने वाले उत्पीड़न की पहचान, उससे बचाव और पीड़ित को सहायता उपलब्ध कराने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि ऑनलाइन उत्पीड़न की स्थिति में संबंधित साक्ष्य सुरक्षित रखें और शिकायत दर्ज कराने में देरी न करें। आपातकालीन सहायता के लिए 112, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और महिला हेल्पलाइन 181 के उपयोग की जानकारी भी दी गई।

अधिकारियों ने कर्मचारियों से अपील की कि वे अपनी व्यक्तिगत और गोपनीय जानकारी की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। साइबर अपराध का शिकार होने पर तुरंत संबंधित विभाग को सूचना दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके। जागरूकता और सतर्कता को डिजिटल धोखाधड़ी से बचने का प्रभावी उपाय बताया गया।कार्यक्रम में साइबर क्राइम थाने के प्रभारी निरीक्षक रहमतुल्लाह खां, उपनिरीक्षक विक्रमादित्य सिंह, नागेंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल रविकांत जायसवाल, राजकुमार, सुधाकर मिश्रा, सदर कोतवाली के निरीक्षक नागेंद्र प्रसाद सिंह तथा मिशन शक्ति विभाग से ज्योति दूबे और अंजली मिश्रा सहित संबंधित टीम के सदस्य मौजूद रहे। टीम में मीनाक्षी यादव, वंदना श्रीवास्तव, सरिता और वंदना साहनी भी शामिल रहीं।इस अवसर पर संस्थान प्रमुख एसए अब्बासी, सहायक निदेशक फरहीन, अर्शी, फैजान, आमिर, जवाहर लाल, संतोष त्रिपाठी, इंतजार, मीरा सिंह, वंदना सिंह, अच्छे लाल, सौहार्द साथी, सुमन, निशा, सुधीर और हरिकेश सहित संस्थान के अन्य कर्मचारी एवं फेलो उपस्थित रहे। ग्रामीण विकास संस्थान ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहयोग देने वाले सभी अधिकारियों और प्रशिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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