गाजीपुर। जिला महिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां 6 साल की नाबालिग रेप पीड़िता को करीब 9 घंटे तक इलाज नहीं मिल सका। दोपहर 2 बजे मेडिकल कॉलेज के जिला महिला अस्पताल पहुंची बच्ची का उपचार रात 11 बजे तक शुरू नहीं हो पाया, जिससे परिजनों में आक्रोश फैल गया और इस खबर को सुन स्थानीय लोग और पत्रकार मौके पर पहुंचे। मौके पर मौजूद चिकित्साधिकारियों की बातों को सुनकर आप भी समझ सकते हैं कि मेडिकल कॉलेज और सीएमओ कार्यालय के बीच तालमेल की कमी के कारण पीड़िता को समय पर इलाज नहीं मिल सका। महिला चिकित्सालय के डॉक्टरों ने मेडिको-लीगल प्रक्रिया का हवाला देते हुए बच्ची को जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया, लेकिन वहां भी इलाज शुरू नहीं हुआ। क्योंकि बकौल सीएमओ गाजीपुर ये दोनों अस्पताल चिकित्सा शिक्षा विभाग यानी मेडिकल कॉलेज के अधीन और वो उनके जूरिडिक्शन के बाहर है, लेकिन हंगामा बढ़ता देख उन्होंने तत्काल चिकित्सा का आश्वासन दिया, फिर मौके पर जिला महिला की वो डॉक्टर्स भी आई और ये दलील दी कि ये लोग 4 बजे आए और चुकी मामला पॉक्सो का था इसलिए ट्रॉमा सेंटर मेडिको लीगल के लिए भेजा गया था क्योंकि उसके बगैर इलाज संभव नहीं है। इन सबमें पीड़िता मां बाप की गोद में बिना इलाज भटकती रही उसके बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा जिम्मेदार सरकारी चिकित्सकों की दलील से बढ़ गया और जैसा कि आप वीडियो में देख सकते हैं कि महिला अस्पताल के बाहर हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई। घटना से नाराज परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने का प्रयास किया। सीएमओ गाजीपुर ने सफाई देते हुए कहा कि संबंधित अस्पताल मेडिकल कॉलेज के अधीन आता है, हालांकि उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि पीड़िता का इलाज सुनिश्चित किया जाएगा। यह घटना एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों और संवेदनहीनता को उजागर करती है, जहां गंभीर मामलों में भी समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। वहीं इस मामले में एडिशनल एसपी गाजीपुर का बयान आया उन्होंने बताया पीड़ित और आरोपी दोनों नाबालिग हैं और मामले को दर्ज कर कार्यवाही की जा रही है।



