

गाजीपुर । राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा उप्र. के आदेशानुसार बीआरसी पर आयोजित नोडल शिक्षकों के द्वितीय चरण का पांच दिवसीय प्रशिक्षण सोमवार को संपन्न हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों की पहचान करने और उनकी सीखने की प्रक्रिया को सरल बनाना था। प्रशिक्षण का मुख्य केंद्र बिंदु दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ना और उनकी अधिगम प्रक्रिया को सुगम बनाना था। मास्टर ट्रेनर के रूप में स्पेशल एजुकेटर्स शालिनी कुशवाहा के साथ ही मास्टर ट्रेनर ओमप्रकाश और अखिलेश यादव ने प्रशिक्षण में दिव्यांगजनों की शिक्षा में सूचना एवं संप्रेषण तकनीकी का उपयोग, प्रबंध पाठ सहगामी क्रियाओं का महत्व, अधिगम के लिए सार्वभौमिक क्रियाओं का अनुप्रयोग, होम बेस्ड एजुकेशन की उपयोगिता, समर्थ मोबाइल एप/पोर्टल पर बच्चों की उपस्थिति और एलईपी की जानकारी सहित अन्य विषयों पर प्रशिक्षण दिया। खंड शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार पाण्डेय ने प्रतिभागी नोडल शिक्षकों से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण में सीखी गई बातों को अपने विद्यालयों में अवश्य लागू करें, ताकि इसका लाभ समाज तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान करना है, और शिक्षकों को इस दिशा में पूरी मेहनत करनी चाहिए। प्रशिक्षण में डॉ. रणवीर यादव, शैलेन्द्र कुमार शर्मा, संतोष कुमार सिंह, नरेंद्र यादव, सतीश सिंह, बेचन, अख्तर अली, सत्यभामा दीक्षित, वंदना सोनकर, सरवरी बेगम, जमीला खातून, राजेश दयाल, सुधीर यादव सहित प्रतिभागी नोडल शिक्षक मौजूद रहे।