गाजीपुर। कांग्रेस ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। मंगलवार दोपहर करीब एक बजे राजस्थान सरकार के पूर्व मंत्री और एआईसीसी ऑब्जर्वर सीताराम लाम्बा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।सीताराम लाम्बा ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़े दावे को गंभीर बताते हुए फॉर्म-6 की प्रक्रिया में बदलाव पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, इससे पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। ये कांग्रेस नेता के आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं की गई है। महाराष्ट्र में 39 लाख नए मतदाताओं पर उठाए सवालमहाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच करीब 39 लाख नए मतदाताओं के जुड़ने के मुद्दे पर लाम्बा ने सवाल किया कि इतने नए मतदाता कहां से आए और उनके नाम किस प्रक्रिया के तहत जोड़े गए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सवालों का जवाब देने के बजाय भाजपा नेता कांग्रेस पर पलटवार कर रहे हैं।लाम्बा ने वर्ष 2023 में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून में हुए बदलाव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नियुक्ति समिति की व्यवस्था में बदलाव से चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और जवाबदेही को लेकर चिंताएं पैदा होती हैं। गांव-गांव मतदाताओं को जागरूक करेगी कांग्रेसलाम्बा के अनुसार, 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक चलने वाले ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता देशभर में लोगों से संवाद कर रहे हैं। गाजीपुर में भी गांवों और चौपालों तक पहुंचकर मतदाताओं को जागरूक करने की योजना है।उन्होंने कहा कि अभियान के तहत मतदाता सूची में नाम की स्थिति की जानकारी लेने, पात्र मतदाताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। लाम्बा ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर कार्रवाई नहीं होने पर कांग्रेस अपना आंदोलन और तेज करेगी।संपादकीय सुझाव: प्रकाशित करने से पहले ‘करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने’ और महाराष्ट्र में ‘39 लाख नए मतदाताओं’ के दावों की आधिकारिक आंकड़ों से पुष्टि कर लें। इससे खबर की तथ्यात्मक विश्वसनीयता बनी रहेगी।



