चंडीगढ़ अधिवेशन में क्षत्रिय महासभा के नए पदाधिकारियों की घोषणा, सामाजिक मुद्दों पर जोर

चंडीगढ़ अधिवेशन में क्षत्रिय महासभा के नए पदाधिकारियों की घोषणा, सामाजिक सरोकारों पर जोरगाजीपुर /चंडीगढ़ में दो दिवसीय आयोजित अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का सफल समापन हुआ। इस दौरान देशभर के 24 प्रांतों से आए पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया। अधिवेशन में मथुरा के ऋषिराज सिंह को सर्वसम्मति से अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वहीं संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजा मानवेन्द्र सिंह ने इस नियुक्ति की घोषणा करते हुए संगठन को मजबूत करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम बताया। इसके अलावा टिक्का शिवेंद्र पाल कुटलैहड़ को यूथ विंग का राष्ट्रीय अध्यक्ष, इंदु तोमर को महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्षा तथा SAIL के अवकाश प्राप्त जीएम और गाजीपुर निवासी संजय सिंह को सांस्कृतिक प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि अधिवेशन में समाज से जुड़े कई अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रमुख एजेंडे में आरक्षण व्यवस्था को आर्थिक आधार पर लागू करने,एससी-सटी एक्ट की समीक्षा, महाराणा प्रताप की जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने, तथा क्षत्रिय इतिहास को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल कराने की मांग शामिल रही। इसके साथ ही गरीब छात्रों की शिक्षा में सहायता, यूजीसी कानून में पुनर्विचार, पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण और समाज के इतिहास के प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया गया। अधिवेशन में सामाजिक सरोकारों को प्रमुखता देते हुए गरीब परिवारों के बच्चों की मुफ्त शिक्षा, सामूहिक विवाह, स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन और आर्थिक सहयोग जैसे विषयों पर भी सहमति बनी। साथ ही दहेज प्रथा, शराब सेवन और मृत्यु भोज जैसी कुप्रथाओं को समाप्त करने का आह्वान किया गया। नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष ऋषिराज सिंह ने कहा कि देश में बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा है,जिसको लेकर पूरे भारत में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि संगठन का उद्देश्य केवल क्षत्रिय समाज ही नहीं, बल्कि पूरे देश में सामाजिक एकता, संस्कृति संरक्षण और युवाओं को जागरूक करना है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐतिहासिक किलों, महलों और धरोहरों के संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक सुधार और राष्ट्रहित में कार्य करना महासभा की प्राथमिकता होगी।संगठन की व्यापक सोच अधिवेशन में यह भी रेखांकित किया गया कि देश में क्षत्रिय समाज की संख्या बड़ी है और उनकी एकजुटता से सामाजिक व राष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। महापुरुषों के स्मारक निर्माण, क्षत्रिय भवनों की स्थापना और विभिन्न संगठनों के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। यह अधिवेशन केवल संगठनात्मक बदलाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक सुधार, शिक्षा, संस्कृति संरक्षण और राष्ट्रीय एकता जैसे व्यापक मुद्दों पर गंभीर चिंतन का मंच भी बना।

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