गाजीपुर में लम्पी बीमारी से बचाव की तैयारी तेज, 25 टीमें कर रहीं गोवंशों का टीकाकरण

गाजीपुर। मुख्य विकास अधिकारी आलोक प्रसाद की अध्यक्षता में आज जनपद में मवेशियों में फैलने वाली लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) की रोकथाम एवं प्रभावी नियंत्रण के संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने लम्पी बीमारी के लक्षण, बचाव एवं रोकथाम के लिए पशुपालकों द्वारा बरती जाने वाली सावधानियों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। लम्पी स्किन डिजीज के नियन्त्रण हेतु पशुपालन विभाग, जनपद गाजीपुर द्वारा दिनांक 09.09. 2026 से सम्पूर्ण जनपद में वृहद टीकाकरण अभियान संचालित किया जा रहा है जिसमें कुल 25 टीमें लगायी गयी हैं जिनके द्वारा जनपद के कुल 266143 गोवंशों का टीकाकरण किया जाएगा। टीमो द्वारा प्रतिदिन ग्रामो का भ्रमण कर निःशुल्क टीकाकरण किया जा रहा है। जनपद में अभी लम्पी स्किन डिजीज का प्रकोप नहीं है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इसके प्रकोप को देखते हुए बचाव के लिए जनपद में टीकाकरण किया जा रहा है। रोग के लक्षण- लम्पी स्किन डिजीज एक विषाणुजनित रोग है, रोग में पशु को तेज बुखार, आंख व नाक से पानी गिरना, पैरों में सूजन, पूरे शरीर में कठोर एवं चपटी गांठ आदि प्रकार के लक्षण पाये जाते हैं। कभी-कभी सम्पूर्ण शरीर की चमड़ी विशेष रूप से सिर, गर्दन, थूथन, थनों, गुदा व अंडकोष या योनिमुख के बीच के भाग पर गांठो के उभार बन जाते है। कभी – कभी पूरा शरीर गांठो से ढक जाता है। गांठे (नोडयूल) नेकोटिक और अल्सरेटिव भी हो सकते है, जिससे मक्खियों द्वारा अन्य स्वस्थ पशुओं में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, गम्भीर रूप से प्रभावित जानवरों में नैकोटिव घाव, श्वसन और जठरांत्र में भी विकसित हो जाते है। श्वसन पथ में घाव होने से सांस लेने में कठिनाई होती है, पशुओं का वजन घट जाता है, शरीर कमजोर हो जाता है एवं अत्याधिक कमजोरी से पशु की मृत्यु भी हो सकती है,. गाभिन पशुओं में गर्भपात हो सकता है, दुधारू गायों में दुग्ध उत्पादन काफी कम हो जाता है। रोग प्रकोप के समय क्या करें- सर्वप्रथम निकटतम पशु चिकित्सालय/पशु सेवा केन्द्र को सूचित करें, प्रभावित पशु को स्वस्थ पशु से अलग करें प्रभावित पशुओं का आवागमन प्रतिबन्धित करें, पशुओं को सदैव साफ पानी पिलायें, पशु के दूध को उबाल कर पियें, पशुओं को मच्छरों, मक्खियों, किलनी आदि से बचाने हेतु पशुओं के शरीर पर कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करें। पशुबाड़े और पशु खलिहान की फिनायल/सोडियम हाइपोक्लोराइट इत्यादि का छिड़काव कर उचित कीटाणु शोधन करें, बीमारी पशुओं की देखभाल करने वाले व्यक्ति को भी स्वस्थ पशुओं के बाड़े से दूर रहना चाहिए, पहले स्वस्थ पशुओं को चारा व पानी दें, फिर बीमार पशुओं को दें। बीमार पशुओं का प्रबन्धन करने के पश्चात् हाथ साबुन से धोयें। रोग प्रकोप के समय क्या ना करें – सामूहिक चराई के लिए अपने पशुओं को ना भेजे, पशु मेला एवं प्रदर्शनी में अपने पशुओं का ना भेजे, बीमार एवं स्वस्थ पशुओं को एकसाथ चारा-पानी न करायें, प्रभावित क्षेत्रों से पशु खरीद कर न लायें, यदि किसी पशु की मृत्यु होती है, तो शव को खुले में न फेकें एवं वैज्ञानिक विधि से दफनायें, रोगी पशु के दूध को बछड़े को न पिलायें। जनपद के पशुपालकों से अपील है कि उनके किसी गोवंश में लम्पी स्किन डिजीज के लक्षण पाए जाने पर तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशु सेवा केन्द्र से सम्पर्क करें अथवा पशुपालक के द्वार पर पशु चिकित्सा सुविधा के लिए टोल फ्री नं0-1962 डायल करें।

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