
गाजीपुर: मामला बेसिक शिक्षा विभाग गाजीपुर के शिक्षा क्षेत्र करण्डा का है। यहाँ के खण्ड शिक्षा अधिकारी रवीन्द्र सिंह पटेल रिश्वत मिलते ही भूल जाते हैं की वह खण्ड शिक्षा अधिकारी है। रिश्वत का प्रभाव उन पर ऐसा पड़ता है की जिस अवकाश को स्वीकृत करने का अधिकार सिर्फ बेसिक शिक्षा अधिकारी को है उसे रवींद्र सिंह पटेल ख़ुद ही स्वीकृत कर देते हैं। बाल्य देखभाल अवकाश के लिए शासन द्वारा पारदर्शी व्यवस्था बनाई गई है। प्रथमतः आवेदन प्रधानाध्यापक के पोर्टल पर संबंधित शिक्षिका द्वारा किया जाता है जिसे प्रधानाध्यापक खण्ड शिक्षा अधिकारी को अग्रसारित करते हैं। आवेदन की जांच के उपरांत खण्ड शिक्षा अधिकारी द्वारा उसे स्वीकृति हेतु जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को प्रेषित किया जाता है।
लेकिन जब एक शिक्षिका द्वारा बाल्य देखभाल अवकाश हेतु आवेदन किया जाता तो खंड शिक्षा अधिकारी करंडा रवीन्द्र सिंह द्वारा २० जनवरी की शाम को यह कहते हुए निरस्त कर दिया जाता है कि २५ जनवरी से परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। जब शिक्षिका द्वारा रिश्वत दे दी जाती है तो उससे पुनः २२ जनवरी को आवेदन अपने पोर्टल पर मंगा कर विभागीय व्यवस्था का घोर उल्लंघन करते हुए स्वयं स्वीकृत कर देते है जबकि बाल्यदेखभाल अवकाश स्वीकृत करने का अधिकार सिर्फ जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को है। शिक्षकों का कहना है कि यदि खण्ड शिक्षा अधिकारी करंडा के पोर्टल की जांच की जाये तो ऐसे कई मामले प्रकाश में आयेंगे जिनमें पहले तो उनके द्वारा बाल्य देखभाल अवकाश रिजेक्ट किया जाता है और अगले दिन संबंधित शिक्षिका के विद्यालय पहुँच कर उससे रिश्वत की माँग की जाती है और रिश्वत मिलते ही अगले दिन अवकाश अग्रसारित/स्वीकृत कर देते हैं।
खबर का असर:
भड़ास पर प्रकाशित खबर से भ्रष्टाचारियों के होश उड़े हुए है। सूत्रों से पता चला है की बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी कुछ पुराने और नए फर्जी आरोप लगाकर महासंघ के पदाधिकारियों पर कार्यवाई करने की फिराक में हैं जिससे अध्यापकों का मनोबल टूटे।



