

गाजीपुर । संतान की दीर्घायु, आरोग्य और सुखमय जीवन की कामना के साथ जिले के मुहम्मदाबाद गाजीपुर, जमानियां , सैदपुर सहित पुरे जनपद में महिलाओं ने आस्था पूर्वक जीवित्पुत्रिका व्रत (जिउतिया पर्व) मनाया। रविवार को विभिन्न गंगा घाटों पर व्रती महिलाओं ने दोपहर में पवित्र गंगा स्नान कर आस्था का डुबकी लगाया। इसके बाद माताओं ने मां गंगा को सोने-चांदी से बने जिउतिया एवं साड़ी अर्पित कर पुत्रों के कल्याण की मंगल कामना की। व्रती महिलाओं ने सामूहिक रूप से जिउतिया पर्व की कथा का श्रवण किया और पूजा-अर्चना के दौरान निर्जला उपवास की कठिन साधना का संकल्प लिया। मान्यता है कि तीज की तरह यह व्रत भी बिना आहार और निर्जल रहकर रखा जाता है। तीन दिन तक चलने वाला यह व्रत छठ पर्व की तरह ही बड़े धूमधाम और श्रद्धा से मनाया जाता है। स्थानीय बोली में इसे जिउतिया कहा जाता है। पौराणिक कथा से जुड़ा है व्रत का महत्व महाभारत युद्ध के दौरान अश्वत्थामा ने क्रोध में आकर द्रौपदी के पांच पुत्रों की हत्या कर दी और अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु को भी ब्रह्मास्त्र से नष्ट करने का प्रयास किया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पुण्यों का फल देकर उस अजन्मे शिशु को पुनः जीवन प्रदान किया। वह बालक जीवित्पुत्रिका कहलाया। तभी से संतान की लंबी उम्र और कल्याण की मंगल कामना के लिए जीवित्पुत्रिका व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है ।



