उत्तर प्रदेश सरकार ने वृद्धा पेंशन योजना के तहत आवेदन करने वाले पात्रों के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। नए शासनादेश के अनुसार अब आधार कार्ड को जन्मतिथि के वैध प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस फैसले से हजारों पेंशन धारकों और नए आवेदकों को बड़ा झटका लगा है।
उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार अब पेंशन के लिए आवेदन करने वाले लोगों को जन्मतिथि सत्यापन के लिए अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इसमें राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, पैन कार्ड समेत स्वघोषणा पत्र को अनिवार्य किया गया है। आवेदकों को इन दस्तावेजों की प्रति पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।
शासन ने स्पष्ट किया है कि हाइस्कूल और इंटरमीडिएट के शैक्षिक प्रमाण पत्र को जन्मतिथि का प्राथमिक और सबसे वैध प्रमाण माना जाएगा। जिन लोगों के पास शैक्षिक प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें वैकल्पिक दस्तावेजों का सहारा लेना पड़ेगा। साथ ही आयु प्रमाणन के लिए स्वघोषित शपथ पत्र देना भी जरूरी होगा।
नए नियम का असर वर्ष 2024 और उसके बाद आवेदन करने वाले सभी पात्रों पर पड़ेगा। ऐसे सभी आवेदकों को दोबारा सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना होगा। विभागीय आंकड़ों के अनुसार करीब दो हजार से अधिक वृद्धा पेंशन धारक इस नए नियम के दायरे में आएंगे।
उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि यह कदम दस्तावेजों की पारदर्शिता और सही सत्यापन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों के कई आवेदकों के सामने अब वैध जन्मतिथि प्रमाण जुटाने की चुनौती खड़ी हो गई है।



