
गाजीपुर । सादात मुहर्रम की आठवीं पर शुक्रवार की देर शाम अलम और दुलदुल का प्रसिद्ध जुलूस निकाला गया। जुलूस में शामिल लोग कर्बला के मंजर को याद कर मातम करते रहे। या अली-या हुसैन की सदाओं के बीच सीनाजनी मातम करते हुए खुद को लहूलुहान कर लिया।कर्बला के 72 शहीदों की याद में मुहर्रम की आठवीं तारीख पर कोट साहब के इमामबाड़े से प्रसिद्ध दुलदुल का जुलूस निकाला गया। वहीं शनिवार की शाम चौक पर ताजिया रखे गए। ताजिया और अलम के साथ मातम करते हुए रविवार को जुलूस निकालकर कर्बला में ताजियों को दफन किया जाएगा। कोट साहब के इमामबाड़े से निकले जुलूस में बड़ी तादात में मुस्लिम समुदाय के स्त्री, पुरुष व बच्चे शामिल रहे। दुलदुल जुलूस के आरंभ में कोट साहब के इमामबाड़े में घोड़े को फूलमाला, इत्र, सुन्दर वस्त्र आदि से सुसज्जित कर चना, हलवा, दूध, मलीदा आदि खिलाया गया। शिया समुदाय के लल्लन आब्दी और सेराज अहमद सज्जू ने मरसिया पढ़कर जुलूस की शुरूआत की। महिलाओं ने नौहा पढ़कर मातम किया। कोट साहब के इमामबाड़े से निकलकर जुलूस मुहम्मद हैदर आब्दी के इमामबाड़े के पास स्थित चौक तक पहुंचा। जुलूस में शोक के प्रति शिया समुदाय के लोग नंगे पैर काले वस्त्र पहनकर मातम करते हुए चल रहे थे। यह जुलूस पुनः कोट साहब के इमामबाड़े में पहुंचकर पुरुषों की मजलिस के बाद समाप्त हुआ। जुलूस में एसजेआई आब्दी, लल्लन आब्दी, सैफ अब्बास आब्दी, मुहम्मद हैदर, सेराज अहमद, सारिक, सारिक हुसैन, हसीन अहमद, तारे बाबू, अकील, मुकेश आदि शामिल रहे। सुरक्षा के लिहाज से थानाध्यक्ष बागीश विक्रम सिंह के नेतृत्व में पुलिसकर्मी तैनात रहे।



