सुसुण्डी में विचार-गोष्ठी सह कवि-गोष्ठी, कविताओं और ग़ज़लों से सजा आयोजन
गाजीपुर। साहित्य चेतना समाज के तत्वावधान में आयोजित ‘चेतना-प्रवाह’ कार्यक्रम के अंतर्गत स्वामी विवेकानन्द जयंती की पूर्व संध्या पर विचार-गोष्ठी सह कवि-गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। यह साहित्यिक संध्या सुसुण्डी गाँव में कवयित्री प्रीतम कुशवाहा के आवास पर संपन्न हुई।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती एवं स्वामी विवेकानन्द के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ। कवियों एवं आगंतुकों का स्वागत अनुज व चन्दन ने किया, जबकि सरस्वती वंदना कवयित्री प्रीतम कुशवाहा ने प्रस्तुत की।
संस्था के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने स्वामी विवेकानन्द के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन सेवा, समर्पण और त्याग का प्रतीक है। उन्होंने योग, अध्यात्म और वेदान्त के माध्यम से भारतीय संस्कृति का संदेश विश्व पटल पर पहुँचाया तथा युवाओं को आत्मविश्वास, परिश्रम और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा दी। उनके विचार आज भी समाज और राष्ट्र के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं।
कवि-गोष्ठी में युवा व्यंग्यकार आशुतोष श्रीवास्तव ने स्वामी विवेकानन्द को समर्पित पंक्तियाँ—
“परमहंस के शिष्य, हम सबके अभिमान हो,
माँ भारती के अमर सपूत, भारत का सम्मान हो”—
सुनाकर वातावरण को भावविभोर कर दिया।
नागेश मिश्र ने “तारों से ऊपर चलो…” रचना से श्रोताओं की खूब तालियाँ बटोरीं। अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ की राष्ट्रप्रेरक कविता ने ओज और उत्साह का संचार किया। कवयित्री प्रीतम कुशवाहा की गीतात्मक प्रस्तुति तथा सुदर्शन कुशवाहा ‘चिराग’ की ग़ज़ल ने श्रोताओं को रससिक्त कर दिया।
कार्यक्रम में सर्वजीत कुशवाहा, विवेक, श्रीकृष्ण कुशवाहा, हरिद्वार सिंह कुशवाहा, द्वारिका कुशवाहा, कमलेश, कविता, सावित्री, राधिका, प्रतिभा, कौशिल्या सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि सुदर्शन कुशवाहा ‘चिराग’ ने की, जबकि संचालन सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार नागेश मिश्र ने किया। अंत में संस्था के संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।



