गाजीपुर। कुर्क संपत्ति को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। चर्चित माफिया डॉन रहे मुख्तार अंसारी के चचेरे भाई मंसूर अहमद अंसारी गुरुवार को जिलाधिकारी गाजीपुर के जनता दर्शन में पहुंचे और अपनी कुर्क की गई संपत्ति को तत्काल अवमुक्त कराने की मांग की। इस दौरान वे अपने साथ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 12 मार्च 2026 के आदेश की सर्टिफाइड कॉपी भी लेकर पहुंचे। पूरा मामला थाना मुहम्मदाबाद क्षेत्र के यूसुफपुर बाजार स्थित अंसारी कटरा का है, जिसे वर्ष 2023 में पुलिस और जिला प्रशासन ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट 1986 के तहत मुख्तार अंसारी की कथित बेनामी संपत्ति बताते हुए कुर्क कर सील कर दिया था। इस कार्रवाई के खिलाफ मंसूर अंसारी ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, लेकिन निचली अदालतों से राहत नहीं मिली। आखिरकार मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जहां सुनवाई के बाद न्यायालय ने 12 मार्च 2026 को बड़ा फैसला सुनाते हुए संपत्ति को वैध मान लिया और कुर्की की पूरी कार्रवाई को अवैध करार देते हुए निरस्त कर दिया। कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि संपत्ति को तत्काल मंसूर अंसारी के सुपुर्द किया जाए। इस फैसले के बाद मंसूर अंसारी सीधे डीएम कार्यालय पहुंचे और आदेश के अनुपालन की मांग की। जिलाधिकारी ने उन्हें आश्वासन दिया कि कोर्ट के आदेश के अनुसार जल्द ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस बीच पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह के एक बयान को लेकर भी हलचल तेज हो गई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मंसूर अंसारी ने साफ कहा कि उन्हें इस मामले की कोई प्रत्यक्ष जानकारी नहीं है और यह पूरी तरह जांच का विषय है। मुख्तार अंसारी के चचेरे भाई मंसूर अंसारी ने कहा कि मैं अपनी पुश्तैनी जमीन पर बने अंसारी कटरा की 18 दुकानों के लिए लगातार न्याय की लड़ाई लड़ रहा था। निचली अदालतों से राहत न मिलने के बाद मैंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। माननीय उच्च न्यायालय ने मेरे पक्ष में फैसला देते हुए मेरी संपत्ति को वैध माना और कुर्की की कार्रवाई को गलत ठहराया। आज मैं कोर्ट के आदेश के साथ डीएम साहब के पास आया हूं, ताकि मुझे मेरी संपत्ति वापस मिल सके। साथ ही, जो बातें अधिकारियों द्वारा कोठियां लिखवाने को लेकर कही जा रही हैं, उसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है।



