गाजीपुर । अखिल भारतीय विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संगठन (AIFUCTO) के आह्वान पर, आज पी.जी. कॉलेज शिक्षक संघ, गाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश के शिक्षकों ने सरकार की शिक्षक विरोधी नीतियों के खिलाफ़ अपनी आवाज बुलंद की। शिक्षकों ने लगातार तीन दिनों तक, 24, 25 और 26 मार्च को अपनी बाँहों पर काली पट्टी बाँधकर विरोध प्रदर्शन किया।इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य सरकार पर पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने और नई एवं एकीकृत पेंशन योजना को वापस लेने का दबाव बनाना था। शिक्षकों ने एक स्वर में सरकार से यह भी मांग की कि नई शिक्षा नीति को समाप्त किया जाए, सह आचार्य एवं आचार्य पदों पर पदोन्नति के लिए पीएचडी की अनिवार्यता को खत्म किया जाए, और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की प्रस्तावित विनियमावली (ड्रॉफ्ट रेगुलेशन) 2025 को तत्काल वापस लिया जाए।
इसके अतिरिक्त, शिक्षकों ने अस्थायी, अतिथि और स्ववित्तपोषित शिक्षकों की सेवा शर्तों में सुधार करने और शिक्षकों के सभी रिक्त पदों को भरने की पुरजोर मांग की।
विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के वरिष्ठ संयुक्त मंत्री डॉ. जे. के. राव और महाविद्यालय शिक्षक संघ के नेतृत्व में शिक्षकों ने एकजुट होकर अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने और उन्हें तत्काल पूरा करने का आह्वान किया।
इस सशक्त प्रतिरोध में प्रो. धर्मराज सिंह, डॉ. अखिलेश सिंह, डॉ. अमित कुमार सिंह, डॉ. पंकज यादव, डॉ. रविशंकर वर्मा, डॉ. यशवन्त मौर्या, डॉ. उमा निवास मिश्र, डॉ. मंजीत सिंह, डॉ. सुशील कुमार सिंह, डॉ. आस्था, डॉ. बी. सी. झा, डॉ. बद्री नाथ सिंह, डॉ. अरुण कुमार सिंह, डॉ. राकेश कुमार वर्मा, डॉ. शिव शंकर यादव, डॉ. अनुज कुमार मिश्र, डॉ. प्रदीप कुमार रंजन, डॉ. भोलेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ. अरविंद उपाध्याय, डॉ. स्मृति, डॉ. समरेंद्र नारायण मिश्र सहित बड़ी संख्या में शिक्षकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
इन तीन दिनों के दौरान, महाविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष और कार्यकारिणी सदस्यों के नेतृत्व में शिक्षकों ने महाविद्यालय के मुख्य द्वार पर जोरदार नारेबाजी की और अपनी मांगों के समर्थन में सरकार की नीतियों के खिलाफ़ अपना विरोध दर्ज कराया। शिक्षकों ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी मांगों को अति शीघ्र पूरा किया जाना चाहिए।
यह विरोध प्रदर्शन सरकार को यह स्पष्ट संदेश देता है कि शिक्षक समुदाय अपनी मांगों को लेकर दृढ़ संकल्पित है और यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया तो वे आगे भी आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

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