गाजीपुर /लखनऊ। 5 फरवरी 2026, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों व कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा दिए जाने के फैसले के बावजूद उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, स्ववित्तपोषित शिक्षकों तथा सेवानिवृत्त कर्मियों को इससे बाहर रखे जाने पर गहरा रोष व्याप्त है। इस मुद्दे को लेकर शिक्षक संगठनों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, उत्तर प्रदेश के प्रदेश प्रभारी प्रोफेसर (डॉ.) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में उन्होंने स्मरण कराया कि शिक्षक दिवस 5 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा के शिक्षकों, कर्मचारियों एवं स्ववित्तपोषित शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा की थी। उन्होंने बताया कि 29 जनवरी 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के लगभग 15 लाख शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और कर्मचारियों को यह सुविधा देने का निर्णय लिया गया, लेकिन उच्च शिक्षा विभाग का प्रस्ताव इसमें शामिल नहीं किया गया। इतना ही नहीं, जारी प्रेस विज्ञप्ति और शासनादेशों में भी उच्च शिक्षा से जुड़े शिक्षकों और कर्मचारियों को इस सुविधा से वंचित रखा गया है। प्रोफेसर पाण्डेय ने इसे बेहद निराशाजनक बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की स्पष्ट घोषणा के बावजूद उच्च शिक्षा विभाग द्वारा कैबिनेट में प्रस्ताव न भेजा जाना लोकतांत्रिक व्यवस्था में असाधारण है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह का भेदभाव उच्च शिक्षा के शिक्षकों को आंदोलन के लिए विवश कर रहा है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने उच्च शिक्षा मंत्री से आग्रह किया है कि वे अपनी संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए कैबिनेट निर्णय में संशोधन कराएं और विशेष कैबिनेट बैठक बुलाकर उच्च शिक्षा के सभी कार्यरत शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, स्ववित्तपोषित शिक्षकों तथा पेंशनभोगी कर्मियों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिलाएं। महासंघ ने सरकार से अपील की है कि घोषणा और क्रियान्वयन में समानता सुनिश्चित की जाए, अन्यथा शिक्षक समुदाय में बढ़ते असंतोष को रोकना कठिन होगा। यह मुद्दा फिलहाल उच्च शिक्षा के शिक्षक संगठनों में गरमागरम चर्चा का विषय बना हुआ है और निकट भविष्य में बड़े आंदोलन की आशंका जताई जा रही है।



