

गाजीपुर। पूर्वांचल की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भूमि पर एक बार फिर योग गुरु सत्यनारायण यादव, निदेशक अर्चना योगा तंत्र, नई दिल्ली का आगमन हुआ। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि उनका संस्थान योग, प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद, ऋषि-मुनियों की प्राचीन विद्याओं तथा भारतीय संस्कृति के संरक्षण और प्रसार के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण, बाल विकास और पर्यावरण सुरक्षा जैसे कई सामाजिक कार्यों में राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय है।
“ऋषि विद्या और कृषि विद्या को फिर से दिनचर्या में लाना समय की मांग”
अपने गाजीपुर आगमन पर योग गुरु यादव ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण प्रदूषण और मिलावटी खान-पान के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं। सब्जियों से लेकर फलों और खाद्यान्न तक में रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग आम जनता के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
उन्होंने कहा,
“किडनी, लिवर, हार्ट और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का बड़ा कारण हमारा दूषित खान-पान है। हम प्रकृति और भारतीय संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। इसी को सुधारने के लिए हमारा राष्ट्रीय अभियान चल रहा है।”
उन्होंने बताया कि इफ्को (IFFCO) के सहयोग से संस्थान देशभर में योजनाबद्ध तरीके से जैविक खेती, प्राकृतिक जीवन शैली और ऋषि परंपरा की शिक्षाओं को पुनर्जीवित करने के लिए अभियान चला रहा है। इसी क्रम में वे गाजीपुर सहित पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।
गाजीपुर से विशेष लगाव, जन्मभूमि को लौटाने की चाह
गाजीपुर में कार्यक्रमों के विस्तार पर बात करते हुए योग गुरु ने भावुकता व्यक्त की।
उन्होंने कहा,
“गाजीपुर मेरी जन्मभूमि है। आज जो भी हूँ, वह यहाँ की मिट्टी, यहाँ के संस्कारों की वजह से हूँ। इसलिए मेरा प्रयास है कि इस जिले के हर क्षेत्र—स्कूल, कॉलेज, गांव-समाज—तक अपने 50 वर्षों का अनुभव पहुँचाऊँ।”
उन्होंने युवाओं और आम जन से पर्यावरण संरक्षण को व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उनके अनुसार, केवल सरकार या किसी संस्था पर निर्भर रहकर पर्यावरण संकट से नहीं निपटा जा सकता।
तेज विकास और पेड़ों की कटाई पर गंभीर चिंता
योग गुरु यादव ने कहा कि विकास कार्यों की आड़ में लगातार पेड़ों की कटाई हो रही है, जिसके गंभीर परिणाम आज सामने हैं।
उन्होंने कहा,
“पहले चारों ओर बगीचे दिखते थे, आज उनकी जगह कंक्रीट की इमारतें हैं। पेड़ों की कमी से तापमान बढ़ रहा है, जल स्रोत सूख रहे हैं, प्रदूषण चरम पर है। आने वाले समय में यह जीवन के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।”
वृक्षारोपण, योगाभ्यास और जैविक खेती को राष्ट्रीय अभियान बनाने की तैयारी
अर्चना योगा तंत्र संस्थान देशभर में वृक्षारोपण, योगाभ्यास और पर्यावरण जागरूकता के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चला रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर महानगरों तक छोटे-छोटे कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों, युवाओं और किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
योग गुरु ने किसानों को जैविक खेती की ओर लौटने का विशेष संदेश दिया।
वे बोले,
“हमारा देश ऋषि प्रधान और कृषि प्रधान रहा है। किसानों को जैविक खाद स्वयं बनाना चाहिए या इफ्को के जैविक उत्पादों जैसे नैनो यूरिया का उपयोग करना चाहिए। रासायनिक खाद भूमि और जल दोनों को जहरीला बना रही है।”
“पर्यावरण की रक्षा सबकी सामूहिक जिम्मेदारी”
अंत में उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की—
“पर्यावरण, मिट्टी, पानी और हवा को शुद्ध रखना हमारा नैतिक दायित्व है। पेड़ लगाएँ, जल-स्रोत बचाएँ और स्वस्थ जीवन शैली अपनाएँ। यही हमारे संस्थान और मेरा सभी से आग्रह है।”योग गुरु सत्यनारायण यादव के इस संदेश ने एक बार फिर गाजीपुरवासियों में पर्यावरण, संस्कृति और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का नया संचार किया है।



