गाजीपुर। माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर गाजीपुर के ददरीघाट पर गंगा स्नान के दौरान बड़ा हादसा होते-होते टल गया। स्नान करते समय गहरे पानी में चली गई महिला को बचाने के लिए पति ने भी बिना सोचे-समझे गंगा में छलांग लगा दी। तैरना न आने के कारण दोनों ही डूबने लगे, जिससे घाट पर अफरा-तफरी मच गई।
घटना रविवार सुबह की है। बड़ी बाग मोहल्ला निवासी अमर ओझा अपनी पत्नी सुषमा ओझा के साथ गंगा स्नान के लिए ददरीघाट पहुंचे थे। अमर ने पहले स्नान कर लिया था। इसके बाद उनकी पत्नी सुषमा स्नान करने के लिए पानी में उतरीं। स्नान करते-करते वह घाट से लगभग 10 मीटर आगे गहरे पानी में चली गईं और देखते ही देखते डूबने लगीं।
पत्नी को डूबता देख अमर ओझा ने बिना यह सोचे कि उन्हें तैरना नहीं आता, गंगा में छलांग लगा दी। कुछ ही पलों में वह भी डूबने लगे। दोनों को डूबता देख घाट पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया और चीख-पुकार शुरू हो गई।
शोर सुनते ही घाट पर तैनात 34वीं वाहिनी पीएसी की 13 सदस्यीय बाढ़ आपदा राहत टीम तुरंत सक्रिय हो गई। टीम के जवान लाल यादव और सोनू कुमार वर्मा ने बिना देर किए गंगा में छलांग लगाई। स्थानीय नाविक और गोताखोर भी रेस्क्यू में जुट गए।
इसी दौरान टीम के अन्य सदस्य नाव लेकर मौके पर पहुंचे और रबर रिंग फेंकी गई। जवानों और गोताखोरों ने रिंग के सहारे पति-पत्नी को पकड़कर सुरक्षित किनारे तक पहुंचाया। महज 30 सेकंड के भीतर दोनों को गहरे पानी से बाहर निकाल लिया गया।
रेस्क्यू के दौरान अमर और सुषमा एक-दूसरे का हाथ थामे रहे। बाहर निकलने के बाद भी दोनों भावुक नजर आए और रेस्क्यू टीम का बार-बार धन्यवाद करते रहे। सुषमा ओझा ने कहा,
“प्रशासन और राहत टीम की वजह से आज हमारी जान बच पाई। अगर वे समय पर नहीं आते तो हमारी पूरी दुनिया ही खत्म हो जाती।”
घटना के बाद घाट पर मौजूद लोगों ने भी राहत टीम की तत्परता और साहस की सराहना की।





