गाजीपुर। विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन चलाकर लोगों को अपने जाल में फंसाने वाले साइबर ठगों के गिरोह का साइबर क्राइम थाना गाजीपुर ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर ऑनलाइन ठगी करने वाले तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से ₹3 लाख 54 हजार 300 रुपये नकद, भारी संख्या में सिम कार्ड, मोबाइल फोन, ATM कार्ड, कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर और दो चार पहिया वाहन बरामद किए गए हैं।मामले का खुलासा उस समय हुआ जब एक पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई कि अज्ञात लोगों द्वारा गाड़ी खराब होने समेत अन्य बहाने बनाकर साइबर अपराध से अर्जित रकम उसके CSC खाते में मंगाई गई और अगस्त से सितंबर के बीच करीब 15 लाख रुपये नकद निकलवा लिए गए। इसके बाद उसके CSC समेत अन्य बैंक खातों पर फ्रीज/लीन लगने लगे। शिकायत के आधार पर मु0अ0सं0 33/2026 दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की।पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा एवं नोडल साइबर अपराध अपर पुलिस अधीक्षक नगर के निर्देशन तथा पुलिस उपाधीक्षक साइबर अपराध के नेतृत्व में साक्ष्य संकलन, तकनीकी जांच और सर्विलांस सेल की मदद से पुलिस टीम ने गिरोह तक पहुंच बनाई और तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।फेसबुक पर विज्ञापन, फर्जी कॉल सेंटर से ठगीपुलिस के अनुसार गिरोह का मुख्य अभियुक्त सोहन राम मुंबई और दिल्ली में रहकर दूसरे लोगों के नाम-पते पर सिम कार्ड और म्यूल बैंक खाते हासिल करता था। इसके लिए गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर सिम और बैंक खाते लिए जाते थे।इसके बाद सिम कार्ड कुरियर के माध्यम से गाजीपुर में रह रहे उसके बेटे सूर्य प्रकाश अरोरा तक पहुंचाए जाते थे। इन्हीं मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर विदेश में नौकरी देने के आकर्षक विज्ञापन चलाने में किया जाता था।विज्ञापन देखकर नौकरी की तलाश में लोग दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करते थे। कॉल फर्जी कॉल सेंटर में पहुंचती थी, जहां लड़कियों के माध्यम से शुरुआती बातचीत कर पीड़ितों को विदेश में नौकरी का भरोसा दिलाया जाता था।₹5 हजार रजिस्ट्रेशन से शुरू होता था ठगी का खेलपीड़ित को विदेश भेजने के नाम पर पहले ₹5 हजार रजिस्ट्रेशन शुल्क लिया जाता था। इसके बाद बायोडाटा और पासपोर्ट नंबर हासिल कर कूटरचित फर्जी जॉब ऑफर लेटर भेजा जाता था और फिर अलग-अलग बहाने से और अधिक रकम की मांग की जाती थी।विश्वास कायम करने के लिए आरोपियों द्वारा डमी फ्लाइट टिकट तक बुक कराकर पीड़ितों को भेजे जाते थे। इसके बाद मोटी रकम म्यूल खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी।पुलिस के मुताबिक रकम को CSC सेंटर के माध्यम से QR कोड से खातों में मंगाकर नकद और ATM के जरिए निकाला जाता था। कुछ रकम निकालने के लिए आरोपी फैजल खान की भी मदद लेते थे।बरामदगी ने खोली साइबर गिरोह की पूरी पोलपुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹3,54,300 नकद, कंप्यूटर सेट, लैपटॉप, कलर प्रिंटर, 10 मोबाइल फोन, 13 विभिन्न बैंकों के ATM कार्ड, 23 सिम कार्ड और दो चार पहिया वाहन—हुंडई वरना व ईको स्पोर्ट्स बरामद किए हैं।बरामद सिम कार्ड, मोबाइल और दस्तावेजों की पुलिस द्वारा गहनता से जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और कितनी रकम की साइबर ठगी की गई है। मामले की जानकारी I4C/MHA को भी भेजी जाएगी।गिरफ्तार अभियुक्तसोहन राम पुत्र वासुदेव राम, उम्र करीब 45 वर्ष, निवासी सिपाह जहूराबाद, थाना बड़ेसर, गाजीपुर।सूर्य प्रकाश अरोरा पुत्र सोहन राम, उम्र करीब 26 वर्ष, निवासी ग्राम सिपाह जहूराबाद, थाना बड़ेसर, गाजीपुर।फैजल खान उर्फ सन्नी पुत्र लीम अहमद खान, उम्र करीब 29 वर्ष, निवासी कस्बा रजदेपुर, पुलिस चौकी के पास, थाना कोतवाली, गाजीपुर।पुलिस टीम की कार्रवाईगिरफ्तारी और बरामदगी करने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक मो. रहमतुल्लाह खान, निरीक्षक कृष्ण कुमार सिंह, हेड कांस्टेबल रविकान्त जायसवाल, हेड कांस्टेबल राजकुमार, आरक्षी सुधाकर मिश्र तथा सर्विलांस सेल के आरक्षी मयंक सिंह शामिल रहे।पुलिस की साइबर एडवाइजरीपुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर विदेश में नौकरी से संबंधित किसी भी आकर्षक विज्ञापन पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। नौकरी या विदेश भेजने के नाम पर पैसा देने से पहले संबंधित संस्था और ऑफर की फिजिकल एवं आधिकारिक स्तर पर जांच जरूर करें।साइबर फ्रॉड होने पर तत्काल 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएं और साइबर अपराध की शिकायत के लिए cybercrime.gov.in पोर्टल का इस्तेमाल करें।फेसबुक पर विदेश में नौकरी का झांसा देकर करोड़ों की साइबर ठगी! फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 3 गिरफ्तारCOURTESY: V.N.F.A.Thursday, October 08, 2026newsगाजीपुर में साइबर क्राइम पुलिस की बड़ी कार्रवाई, ₹3.54 लाख नकद समेत 23 सिम, 13 ATM कार्ड, 10 मोबाइल और दो लग्जरी कार बरामदगाजीपुर। विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन चलाकर लोगों को अपने जाल में फंसाने वाले साइबर ठगों के गिरोह का साइबर क्राइम थाना गाजीपुर ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर ऑनलाइन ठगी करने वाले तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से ₹3 लाख 54 हजार 300 रुपये नकद, भारी संख्या में सिम कार्ड, मोबाइल फोन, ATM कार्ड, कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर और दो चार पहिया वाहन बरामद किए गए हैं।मामले का खुलासा उस समय हुआ जब एक पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई कि अज्ञात लोगों द्वारा गाड़ी खराब होने समेत अन्य बहाने बनाकर साइबर अपराध से अर्जित रकम उसके CSC खाते में मंगाई गई और अगस्त से सितंबर के बीच करीब 15 लाख रुपये नकद निकलवा लिए गए। इसके बाद उसके CSC समेत अन्य बैंक खातों पर फ्रीज/लीन लगने लगे। शिकायत के आधार पर मु0अ0सं0 33/2026 दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की।पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा एवं नोडल साइबर अपराध अपर पुलिस अधीक्षक नगर के निर्देशन तथा पुलिस उपाधीक्षक साइबर अपराध के नेतृत्व में साक्ष्य संकलन, तकनीकी जांच और सर्विलांस सेल की मदद से पुलिस टीम ने गिरोह तक पहुंच बनाई और तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।फेसबुक पर विज्ञापन, फर्जी कॉल सेंटर से ठगीपुलिस के अनुसार गिरोह का मुख्य अभियुक्त सोहन राम मुंबई और दिल्ली में रहकर दूसरे लोगों के नाम-पते पर सिम कार्ड और म्यूल बैंक खाते हासिल करता था। इसके लिए गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर सिम और बैंक खाते लिए जाते थे।इसके बाद सिम कार्ड कुरियर के माध्यम से गाजीपुर में रह रहे उसके बेटे सूर्य प्रकाश अरोरा तक पहुंचाए जाते थे। इन्हीं मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर विदेश में नौकरी देने के आकर्षक विज्ञापन चलाने में किया जाता था।विज्ञापन देखकर नौकरी की तलाश में लोग दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करते थे। कॉल फर्जी कॉल सेंटर में पहुंचती थी, जहां लड़कियों के माध्यम से शुरुआती बातचीत कर पीड़ितों को विदेश में नौकरी का भरोसा दिलाया जाता था।₹5 हजार रजिस्ट्रेशन से शुरू होता था ठगी का खेलपीड़ित को विदेश भेजने के नाम पर पहले ₹5 हजार रजिस्ट्रेशन शुल्क लिया जाता था। इसके बाद बायोडाटा और पासपोर्ट नंबर हासिल कर कूटरचित फर्जी जॉब ऑफर लेटर भेजा जाता था और फिर अलग-अलग बहाने से और अधिक रकम की मांग की जाती थी।विश्वास कायम करने के लिए आरोपियों द्वारा डमी फ्लाइट टिकट तक बुक कराकर पीड़ितों को भेजे जाते थे। इसके बाद मोटी रकम म्यूल खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी।पुलिस के मुताबिक रकम को CSC सेंटर के माध्यम से QR कोड से खातों में मंगाकर नकद और ATM के जरिए निकाला जाता था। कुछ रकम निकालने के लिए आरोपी फैजल खान की भी मदद लेते थे।बरामदगी ने खोली साइबर गिरोह की पूरी पोलपुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹3,54,300 नकद, कंप्यूटर सेट, लैपटॉप, कलर प्रिंटर, 10 मोबाइल फोन, 13 विभिन्न बैंकों के ATM कार्ड, 23 सिम कार्ड और दो चार पहिया वाहन—हुंडई वरना व ईको स्पोर्ट्स बरामद किए हैं।बरामद सिम कार्ड, मोबाइल और दस्तावेजों की पुलिस द्वारा गहनता से जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और कितनी रकम की साइबर ठगी की गई है। मामले की जानकारी I4C/MHA को भी भेजी जाएगी।गिरफ्तार अभियुक्तसोहन राम पुत्र वासुदेव राम, उम्र करीब 45 वर्ष, निवासी सिपाह जहूराबाद, थाना बड़ेसर, गाजीपुर।सूर्य प्रकाश अरोरा पुत्र सोहन राम, उम्र करीब 26 वर्ष, निवासी ग्राम सिपाह जहूराबाद, थाना बड़ेसर, गाजीपुर।फैजल खान उर्फ सन्नी पुत्र लीम अहमद खान, उम्र करीब 29 वर्ष, निवासी कस्बा रजदेपुर, पुलिस चौकी के पास, थाना कोतवाली, गाजीपुर।पुलिस टीम की कार्रवाईगिरफ्तारी और बरामदगी करने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक मो. रहमतुल्लाह खान, निरीक्षक कृष्ण कुमार सिंह, हेड कांस्टेबल रविकान्त जायसवाल, हेड कांस्टेबल राजकुमार, आरक्षी सुधाकर मिश्र तथा सर्विलांस सेल के आरक्षी मयंक सिंह शामिल रहे।पुलिस की साइबर एडवाइजरीपुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर विदेश में नौकरी से संबंधित किसी भी आकर्षक विज्ञापन पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। नौकरी या विदेश भेजने के नाम पर पैसा देने से पहले संबंधित संस्था और ऑफर की फिजिकल एवं आधिकारिक स्तर पर जांच जरूर करें।साइबर फ्रॉड होने पर तत्काल 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएं और साइबर अपराध की शिकायत के लिए cybercrime.gov.in पोर्टल का इस्तेमाल करें।



