गाजीपुर। शेरपुर पंचायत अंतर्गत शेरपुर खुर्द गांव स्थित हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित महामृत्युंजय महायज्ञ के पावन अवसर पर आज चार बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार श्रद्धा और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अनुष्ठान में अनंत विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य दंडी स्वामी अनन्तानन्द सरस्वती जी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की। आचार्य नरेन्द्र भार्गव के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ बटुकों को यज्ञोपवीत धारण कराया गया। यज्ञोपवीत संस्कार को हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे बालक के आध्यात्मिक और बौद्धिक जीवन की औपचारिक शुरुआत के रूप में देखा जाता है, जहाँ उसे (द्विज ) अर्थात दूसरा जन्म प्राप्त होता है। यह संस्कार व्यक्ति को वैदिक अध्ययन, अनुशासन और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। संस्कार की प्रमुख रस्मों में मुंडन, जनेऊ धारण (यज्ञोपवीत धारण), गायत्री मंत्र की दीक्षा तथा भिक्षा-विधान शामिल हैं। जनेऊ के तीन धागे ऋषि ऋण, देव ऋण और पितृ ऋण के प्रतीक माने जाते हैं, जो व्यक्ति को अपने कर्तव्यों और दायित्वों का स्मरण कराते हैं। इसे बाएं कंधे से दाईं कमर की ओर धारण किया जाता है, जो संयम, शुचिता और कर्तव्यपरायणता का प्रतीक है। जगद्गुरु अनंन्तानंन्द जी ने कहा कि इस आयोजन का मूल उद्देश्य वैदिक परंपरा का पालन करते हुए नवयुवकों को संस्कारित करना और उन्हें धर्म, ज्ञान एवं नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करना है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच इस पवित्र संस्कार के साक्षी बनकर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की। संस्कार के उपरांत जानकारी दी गई कि बटुकों को कल गुरु मंत्र प्रदान कर औपचारिक रूप से शिष्य बनाया जाएगा। पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।



