
आपसी घमासान, हिस्सेदारी की लड़ाई और टेंडर मैनेजमेंट फेल—अपरिहार्य कारण बताकर पूरी प्रक्रिया रद्द
गाजीपुर। जिला पंचायत से निकाले गए करीब 40 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के टेंडर आखिरकार आपसी खींचतान और ठेकेदारों की जंग की भेंट चढ़ गए। नाली, सीसी रोड और खंडजा जैसे 300 से अधिक विकास कार्यों के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया को ऐन मौके पर निरस्त कर दिया गया। जबकि यह पूरा बजट वित्तीय वर्ष 2025-26 में 31 मार्च तक खर्च होना अनिवार्य है।
सूत्रों के मुताबिक, 67 सदस्यीय जिला पंचायत में लंबे समय से बराबर हिस्सेदारी को लेकर जबरदस्त घमासान चल रहा था। बोर्ड बैठकों में हंगामा, पर्दे के पीछे सौदेबाजी और गुटबाजी के बीच किसी तरह सहमति बनी, तो करीबी खेमा मुखर हो गया। कई दौर की बातचीत के बाद भी सहमति का रास्ता नहीं निकल सका।
शुक्रवार को स्थिति उस वक्त और विस्फोटक हो गई, जब कई बड़े कार्यों पर अप्रत्याशित रूप से टेंडर डाल दिए गए। इससे कथित टेंडर मैनेजमेंट की पूरी रणनीति फेल हो गई। ऑनलाइन प्रक्रिया में करीब 100 टेंडर पड़ने की संभावना से खलबली मच गई।
शनिवार को जिला पंचायत कार्यालय में ठेकेदारों का जमावड़ा लगा रहा, लेकिन ऐन वक्त पर जिला पंचायत अध्यक्ष सपना सिंह की ओर से “टेंडर कराने में कठिनाई” का हवाला देते हुए अपरिहार्य कारणों से पूरी प्रक्रिया रद्द कर दी गई।
अपर मुख्य अधिकारी संतोष कुमार ने जिला पंचायत अध्यक्ष के आदेश पर टेंडर निरस्तीकरण का पत्र जारी कर दिया। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि समय पर टेंडर न होने की स्थिति में क्या 40 करोड़ का बजट लैप्स होगा? और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
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