
गाजीपुर । विशेष न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश रामावतार प्रसाद की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक जघन्य मामले में सौतेले पिता को आजीवन कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सज़ा सुनाई है। यह फैसला उत्तर प्रदेश के न्यायिक प्रक्रिया के लिए एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि यह मात्र 15 दिनों में और कुल 11 सुनवाई तारीखों पर फैसला आया है। यह घटना 18 जुलाई 2025 को गाजीपुर जिले के शादियाबाद थाना क्षेत्र के एक गाँव में हुई, जिसमें मात्र एक वर्ष की बच्ची के साथ उसके सौतेले पिता ने दुष्कर्म किया, जिससे बच्ची का प्राइवेट पार्ट गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया। पॉक्सो कोर्ट के विशेष लोक अभियोजक प्रभु नारायण सिंह ने बताया कि घटना के समय पीड़िता की माँ खेत में धान रोपने गई थी। घर लौटने पर उन्होंने अपनी बेटी को बदहवास और रोते हुए पाया। जब माँ ने बच्ची के प्राइवेट पार्ट से काफी रक्तस्राव देखा तो वह स्तब्ध रह गईं।शुरु में लोक-लाज के भय से बच्ची की दादी ने माँ को दो दिनों तक थाने जाने से रोक दिया। बावजूद इसके, बच्ची की माँ ने किसी तरह परिवार से छुपकर थाने पहुँचकर लिखित तहरीर दी। पुलिस ने 20 जुलाई 2025 को शादियाबाद थाने में मुकदमा दर्ज किया और आरोपी सौतेले पिता को गिरफ्तार कर लिया।पीड़िता की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे पहले मेडिकल कॉलेज, गाजीपुर फिर वाराणसी ट्रामा सेंटर रेफर किया गया, जहाँ उसका इलाज अभी भी जारी है और उसके पाँच से छह ऑपरेशन हो चुके हैं। इस मामले में 12 सितंबर को न्यायालय में चार्ज फ्रेम हुआ और 15 सितंबर से सुनवाई शुरू हुई। न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के बाद, केवल 11 तारीखों पर सुनवाई पूरी करते हुए, इस जघन्य अपराध पर तत्काल फैसला सुनाया, जो न्याय के त्वरित और कठोर होने का एक मजबूत संदेश है।



